भारत ने Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. UN सुरक्षा परिषद में भारत ने इन हमलों को बेहद दुखद और अस्वीकार्य बताया. भारत के लिए यह मामला सिर्फ व्यापार का नहीं बल्कि देश की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है, क्योंकि इस रास्ते से भारत का काफी तेल और सामान आता है.

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भारत ने UN में क्या कहा और क्यों?

भारत की डिप्टी परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव Yojna Patel ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को UN सुरक्षा परिषद में भारत का पक्ष रखा. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इन हमलों की वजह से भारतीय नाविकों की जान गई है, जो बहुत दुखद है. भारत का कहना है कि समुद्र में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना और नाविकों की जान खतरे में डालना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. भारत ने मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के हिसाब से समुद्र में जहाजों का रास्ता तुरंत सुरक्षित और खुला किया जाए.

Strait of Hormuz विवाद और भारत पर असर

यह विवाद 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ था, जिसके बाद Strait of Hormuz में जहाजों का आना-जाना मुश्किल हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक 22 अप्रैल 2026 को ईरान ने तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला किया था. भारत ने इस मुद्दे पर पहले भी चिंता जताई थी और 11 मार्च 2026 को पारित Resolution 2817 का समर्थन किया था. भारत चाहता है कि UNCLOS कानून का पालन हो ताकि ग्लोबल कॉमर्स और जहाजों की आवाजाही पर कोई असर न पड़े.

क्षेत्र में मौजूदा तनाव और अन्य देशों की भूमिका

इस पूरे विवाद में अमेरिका ने भी दखल दिया है और 13 अप्रैल 2026 से ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है. वहीं, बहरीन ने UN सुरक्षा परिषद में ईरान के हमलों की निंदा करने वाला प्रस्ताव पेश किया था, जिसका भारत ने साथ दिया. इससे पहले 17 अप्रैल 2026 को भारत के परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव Ambassador Parvathaneni Harish ने भी UN जनरल असेंबली में इसी तरह की चिंताएं जाहिर की थीं.

Frequently Asked Questions (FAQs)

Strait of Hormuz में क्या विवाद चल रहा है?

यहाँ व्यापारिक जहाजों पर हमले हो रहे हैं और रास्ता बाधित है. इस वजह से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है क्योंकि यह रास्ता व्यापार के लिए बहुत अहम है.

भारत ने UN में क्या मांग की है?

भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के तहत समुद्र में सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के जहाजों के आवागमन की मांग की है ताकि नाविकों की जान सुरक्षित रहे.