भारत सरकार का बड़ा फैसला, सल्फर निर्यात पर लग सकती है रोक, किसानों और खाद की कीमतों पर पड़ेगा असर

भारत में सल्फर की सप्लाई घटने और कीमतें बढ़ने से सरकार अब इसके निर्यात को रोकने या सीमित करने पर विचार कर रही है। मध्य पूर्व में तनाव और चीन के कड़े फैसलों की वजह से देश में खाद बनाने वाले कच्चे माल की किल्लत हो गई है। सरकार चाहती है कि घरेलू जरूरतों को पहले पूरा किया जाए ताकि खेती और किसानों को परेशानी न हो।

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सल्फर की कमी क्यों हो रही है और किसानों पर क्या असर पड़ेगा?

मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव की वजह से सल्फर की सप्लाई चेन टूट गई है। इसके अलावा चीन ने मई 2026 से सल्फ्यूरिक एसिड के निर्यात पर लगभग पूरी तरह रोक लगाने का संकेत दिया है। सल्फर का इस्तेमाल मुख्य रूप से अमोनियम सल्फेट और सिंगल सुपर फॉस्फेट जैसे खाद बनाने में होता है। अगर इसकी कमी रही तो खाद महंगी होगी और वैश्विक स्तर पर फसलों की पैदावार में गिरावट आ सकती है।

सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए क्या इंतजाम किए हैं?

भारत सरकार ने उर्वरक उद्योगों को राहत देने के लिए 30 जून 2026 तक अमोनियम नाइट्रेट और फॉस्फोरिक एसिड जैसे 40 रसायनों पर सीमा शुल्क हटा दिया है। साथ ही, अब ‘सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री के लिए राष्ट्रीय ढांचा’ लागू करने की तैयारी है। इसके तहत किसानों को उनकी जमीन और फसल के हिसाब से ही खाद बेची जाएगी ताकि कोई खाद की जमाखोरी न कर सके। सरकार अब रूस, मोरक्को और कनाडा जैसे वैकल्पिक देशों से सप्लाई लेने की कोशिश कर रही है।

विवरण स्थिति/कीमत असर/समय सीमा
सल्फर की कीमत (अप्रैल 2026) $600 प्रति टन मार्च से $70 की बढ़ोतरी
अमोनिया की कीमतों में वृद्धि 30% बढ़ोतरी पिछली तिमाही में
सल्फर की कीमतों में वृद्धि 21% बढ़ोतरी पिछली तिमाही में
अंतरराष्ट्रीय यूरिया कीमत लगभग 800 डॉलर प्रति टन वैश्विक बाजार में तेजी
चीन का निर्यात प्रतिबंध सल्फ्यूरिक एसिड मई 2026 से लागू
सीमा शुल्क (Customs Duty) छूट 40 प्रमुख रसायन 30 जून 2026 तक
यूरिया की प्रस्तावित सीमा 5-6 बैग प्रति हेक्टेयर नया राष्ट्रीय ढांचा