भारत और साइप्रस के बीच द्विपक्षीय रिश्ते अब एक नए और मजबूत स्तर पर पहुंच गए हैं। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदल दिया है। इस बड़े बदलाव के बाद साइप्रस ने भारत से घातक ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। साइप्रस का यह फैसला भारत द्वारा पिछले साल चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय हथियारों के बेहतरीन प्रदर्शन को देखने के बाद आया है।

साइप्रस क्यों खरीदना चाहता है भारत के बने सैन्य हथियार?

साइप्रस ने भारत के रक्षा उपकरणों, विशेष रूप से ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों (unmanned systems) को खरीदने की इच्छा जताई है। साइप्रस के अधिकारियों के अनुसार, भारत की सैन्य क्षमताओं ने असली परिस्थितियों में खुद को साबित किया है। भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय हथियारों की सटीकता और क्षमता देखने के बाद साइप्रस की कई रक्षा कंपनियां भारतीय निर्माताओं के साथ बातचीत कर रही हैं। दोनों देश मिलकर रक्षा तकनीक साझा करने और संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं। भारतीय रक्षा उत्पादक संगठन (SIDM) ने भी साइप्रस के रक्षा क्लस्टर के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जिसने दुनिया का ध्यान खींचा?

भारत ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। यह ऑपरेशन कश्मीर के पहलगाम में हुए एक आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें कई नागरिकों की जान चली गई थी। इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सीमा पार मौजूद आतंकी ठिकानों को नष्ट करना था। इस ऑपरेशन की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार थीं:

  • घातक हथियारों का सफल प्रयोग: भारत ने इस ऑपरेशन में स्वदेशी नागास्त्र-1 लोइटरिंग म्यूनिशन, स्काई स्ट्राइकर, राफेल लड़ाकू विमानों से दागी जाने वाली एसकेएलपी मिसाइलें और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था।
  • सटीक और प्रभावी कार्रवाई: भारतीय सेना ने बिना किसी बड़े नुकसान के आतंकियों के ठिकानों को पूरी तरह से तबाह कर दिया।
  • मजबूत सुरक्षा कवच: भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन की तरफ से आने वाले 95 प्रतिशत से अधिक हमलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया था।

अगले पांच सालों के लिए बना खास रक्षा रोडमैप

भारत और साइप्रस ने मिलकर साल 2026 से 2031 तक के लिए एक पांच साल का रक्षा सहयोग रोडमैप तैयार किया है। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि यह रोडमैप दोनों देशों के बीच क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी पर केंद्रित रहेगा। इसके तहत दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास भी आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक विशेष ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप बनाने का भी फैसला किया है। साइप्रस अब इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में भी शामिल हो गया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

साइप्रस भारत से कौन से सैन्य उपकरण खरीदना चाहता है?

साइप्रस भारत से मुख्य रूप से मानवरहित प्रणाली, सैन्य ड्रोन और अन्य आधुनिक रक्षा उपकरण खरीदने की योजना बना रहा है। इसके लिए दोनों देशों की रक्षा कंपनियों के बीच बातचीत चल रही है।

भारत और साइप्रस के बीच नया रक्षा रोडमैप क्या है?

दोनों देशों ने साल 2026 से 2031 तक के लिए एक पांच वर्षीय रक्षा रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत दोनों देश मिलकर संयुक्त सैन्य अभ्यास, तकनीकी सहयोग और रक्षा उपकरणों के उत्पादन पर काम करेंगे।