भारत में डिजिटल क्रांति तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन डाटा सेंटर बनाने के लिए पैसों की कमी एक बड़ी रुकावट बन गई है। फिलहाल ये काम सिर्फ बड़े अमीरों और प्राइवेट कंपनियों तक सीमित है, जिससे नए प्रोजेक्ट्स में दिक्कत आ रही है। अब वित्तीय एक्सपर्ट Rishi Acharya ने एक ऐसा मॉडल सुझाया है जिससे इस सेक्टर में निवेश आसान हो जाएगा और देश की डिजिटल रफ्तार बढ़ेगी।

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डाटा सेंटर सेक्टर में क्या है समस्या और क्या है नया समाधान?

भारत को अगले कुछ सालों में पर्याप्त डाटा सेंटर बनाने के लिए करीब 10 अरब डॉलर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई ऑपरेटरों का पैसा पुरानी जमीनों और इमारतों में फंसा हुआ है, जिसे वे नए काम में नहीं लगा पा रहे हैं। Rishi Acharya ने SEBI के InvIT फ्रेमवर्क के जरिए ‘फ्रैक्शनल ओनरशिप’ का सुझाव दिया है। इससे आम निवेशक भी इस बिजनेस में छोटा हिस्सा खरीद सकेंगे और फंसा हुआ पैसा नए निर्माण कार्यों में इस्तेमाल हो सकेगा।

सरकार ने डाटा सेंटर के लिए क्या बड़े नियम बनाए हैं?

भारत सरकार डाटा सेंटर को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है। बजट 2026-27 में साल 2047 तक टैक्स हॉलिडे की सुविधा दी गई है ताकि विदेशी निवेश बढ़े। ड्राफ्ट नेशनल डाटा सेंटर पॉलिसी 2025 के तहत ऑपरेटरों को 20 साल तक टैक्स में छूट मिल सकती है। इसके अलावा, इन्हें ‘Essential Service’ यानी जरूरी सेवा के रूप में मान्यता देने पर विचार चल रहा है, जिससे किसी भी संकट के दौरान इनका कामकाज नहीं रुकेगा।

भारत में डाटा सेंटर के लिए निवेश और क्षमता का ब्यौरा

भारत को ग्लोबल AI और क्लाउड हब बनाने के लिए बड़ी कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। मुंबई, दिल्ली-NCR और बेंगलुरु के साथ-साथ अब विजाग जैसे शहर भी नए हब बन रहे हैं।

कंपनी/लक्ष्य निवेश या क्षमता
Google 15 अरब डॉलर
Microsoft 17.5 अरब डॉलर
Amazon 35 अरब डॉलर
Reliance Industries 98,000 करोड़ रुपये
Lodha Developers 1 लाख करोड़ रुपये
कुल क्षमता (2030 तक) 10 GW
कुल निवेश लक्ष्य 200 अरब डॉलर
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.