भारत सरकार ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के जनाजे में अपने प्रतिनिधियों को भेजने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को बताया कि बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री Pabitra Margherita 3 जुलाई (शुक्रवार) को ईरान जाएंगे।

अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। 28 फरवरी 2026 को उनकी हत्या कर दी गई थी और 1 मार्च 2026 को उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई थी। उनके सम्मान में ईरान में बड़े स्तर पर अंतिम संस्कार की तैयारी की गई है।

जनाजे का पूरा कार्यक्रम

ईरान में खामेनेई के जनाजे की रस्में कई दिनों तक चलेंगी। कार्यक्रम की जानकारी इस प्रकार है:

  • 4 और 5 जुलाई: तेहरान में विदाई समारोह होगा।
  • 6 जुलाई: तेहरान में मुख्य जनाजे का जुलूस निकाला जाएगा।
  • 7 जुलाई: কোম (Qom) शहर में रस्में निभाई जाएंगी।
  • 9 जुलाई: मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस हाई-लेवल प्रतिनिधिमंडल को भेजना भारत और ईरान के बीच पुराने सांस्कृतिक रिश्तों और लोगों के मजबूत संबंधों की वजह से तय किया गया है। यही संबंध दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों का आधार हैं।

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता दिया था, लेकिन भारत ने अपनी ओर से बिहार के राज्यपाल और विदेश राज्य मंत्री को भेजने का निर्णय लिया।

इस कार्यक्रम में दुनिया के कई अन्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। चीन, रूस, पाकिस्तान और कतर से भी डेलिगेशन आने की उम्मीद है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी अपने आने की पुष्टि की है।

दूसरी तरफ, ईरान ने इस दौरान सुरक्षा को लेकर सख्ती बरती है। ईरान ने अमेरिका और इसराइल को चेतावनी दी है कि जनाजे के जुलूस के दौरान किसी भी तरह का हमला न किया जाए।