India ने श्रीलंका को भेजा 250 मीट्रिक टन से अधिक बेली ब्रिज का नया जखीरा, चक्रवात पीड़ितों की मदद के लिए उठाया बड़ा कदम.

भारत सरकार ने अपनी मानवीय सहायता और 'Neighbourhood First' नीति के तहत श्रीलंका को एक बार फिर बड़ी मदद पहुंचाई है। श्रीलंका में आए खतरनाक चक्रवात Cyclone Ditwah के बाद वहां के बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए 8 अगस्त 2026 को 250 मीट्रिक टन (MT) से ज्यादा वजन के बेली ब्रिज (Bailey Bridges) की एक और खेप सौंपी गई है। इस बात की जानकारी भारतीय उच्च आयोग (Indian High Commission) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी है और बताया है कि इन पुलों का मुख्य उद्देश्य टूटे हुए रास्तों को जोड़ना और लोगों के जीवन को सामान्य बनाना है।
भारत की तरफ से श्रीलंका को मिला बड़ा पुनर्निर्माण पैकेज
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह डिलीवरी ठीक एक ऐसी ही अन्य खेप के बाद दी गई है, जिसका वजन भी 250 मीट्रिक टन से अधिक था और जिसे 6 अगस्त 2026 को श्रीलंका को सौंपा गया था। उस समय यह महत्वपूर्ण हैंडओवर भारत के उप उच्च आयुक्त मैत्रेय के द्वारा श्रीलंका के सहकारी विकास उप मंत्री उपाली समरसिंघे को दिया गया था। इस पूरी मदद के पीछे भारत का कुल 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एक बड़ा पुनर्निर्माण पैकेज है, जिसके तहत श्रीलंका में राहत और विकास के काम तेजी से किए जा रहे हैं। इस पैकेज में 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रियायत ऋण लाइनें (Lines of Credit) और 100 million USD के अनुदान शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल चक्रवात से प्रभावित इलाकों में रिकवरी और खरीद जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।
उच्च स्तरीय बैठक और आगे की योजनाएं
इस राहत कार्य के सिलसिले में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्र ने 7 अगस्त 2026 को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई और 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर के भारतीय रुपये में मूल्यवान ऋण समझौतों का आदान-प्रदान भी किया गया। भारत सरकार की विजन MAHASAGAR और पड़ोसी पहले की नीति के तहत भारतीय सेना के इंजीनियर श्रीलंका के अलग-अलग हिस्सों में इन पुलों को स्थापित कर रहे हैं ताकि तुरंत रास्ता बहाल किया जा सके। अब तक श्रीलंका में सात जगहों पर ऐसे आठ बेली ब्रिज लगाए जा चुके हैं और आने वाले दिनों में भारत इन इलाकों में पक्के पुलों का निर्माण कार्य भी शुरू करने वाला है। इसके अलावा दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बिजली ग्रिड इंटरकनेक्शन, संपूर सौर ऊर्जा परियोजना (Sampur solar power project) और त्रिंकोमाली को एक ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी बातचीत हुई है।