प्रधानमंत्री Narendra Modi ने France में G7 Summit के दौरान यूरोपीय संघ (EU) के नेताओं के साथ एक अहम बैठक की। इस मुलाकात में भारत और EU के बीच होने वाले ऐतिहासिक Free Trade Agreement (FTA) को जल्द पूरा करने पर बात हुई। इस बड़े समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, जिससे करीब 200 करोड़ लोगों के लिए एक बड़ा फ्री मार्केट तैयार होगा और ग्लोबल ट्रेड, डिफेंस और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ इस महत्वाकांक्षी समझौते पर साल 2026 के अंत तक औपचारिक रूप से साइन कर लेंगे। 17 जून 2026 को G7 Summit के दौरान प्रधानमंत्री Modi ने Ursula von der Leyen और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष António Costa के साथ त्रिपक्षीय बैठक की। इस समझौते के साइन होने के बाद, दोनों पक्षों की मंजूरी मिलने पर यह 2027 की शुरुआत से लागू होगा।

व्यापार नियमों में बड़े बदलाव

इस समझौते का मकसद सामान, सेवाओं और निवेश के नियमों को आसान बनाना है। यूरोपीय आयोग के मुताबिक, इससे यूरोपीय संघ के भारत आने वाले करीब 97 प्रतिशत एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स (Tariffs) कम हो जाएंगे, जिससे हर साल लगभग 4 अरब यूरो की बचत होगी। इसके अलावा, भारत EU से आने वाली कारों पर लगने वाले टैक्स को 110 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करने की योजना बना रहा है।

व्यापार और टैक्स से जुड़े मुख्य आंकड़े नीचे दी गई टेबल में दिए गए हैं:

विवरण यूरोपीय संघ (EU) भारत (India)
टैरिफ लाइन्स में कटौती 90% से ज्यादा 86%
ट्रेड वैल्यू कवरेज 91% 93%
कुल ट्रेड लिबरलाइजेशन 99.3% 96.6%
EU कारों पर भारत का नया टैक्स 40% (पहले 110% था)
EU एक्सपोर्ट टैक्स में कटौती 97% तक
अनुमानित सालाना बचत (EU के लिए) €4 अरब

इस समझौते में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, सतत विकास (Sustainable Development) और कस्टम प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है। Ursula von der Leyen ने सुरक्षा और डिफेंस सहयोग को बढ़ाने और India-Middle East-Europe Corridor (IMEC) को आगे ले जाने की बात भी कही।

भारत के विदेश मंत्रालय ने इन बातचीत के नतीजे को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते के जल्द लागू होने से व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे और सप्लाई चेन में विविधता आएगी। इस समझौते को लागू करने के लिए यूरोपीय संघ की परिषद, यूरोपीय संसद और भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी जरूरी होगी।

इस पूरी प्रक्रिया में भारत की ओर से प्रधानमंत्री Narendra Modi और व्यापार मंत्री Piyush Goyal, जबकि EU की ओर से Ursula von der Leyen, António Costa और मुख्य वार्ताकार Maroš Šefčovič अहम भूमिका निभा रहे हैं।