भारत सरकार ने पड़ोसी देशों से आने वाले विदेशी निवेश (FDI) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब उन विदेशी कंपनियों के लिए रास्ता आसान होगा जिनमें भारत के साथ जमीन साझा करने वाले देशों की हिस्सेदारी 10% या उससे कम है। वित्त मंत्रालय ने 2 मई 2026 को इस नए नियम की आधिकारिक सूचना जारी कर दी है, जिससे निवेश की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

नया FDI नियम क्या है और किसे मिलेगी छूट?

सरकार ने 2020 में लगाए गए सख्त नियमों में कुछ ढील दी है। अब अगर किसी विदेशी कंपनी में भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों (जैसे चीन, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार और अफगानिस्तान) की हिस्सेदारी 10% या उससे कम है और उनके पास कंपनी का कंट्रोल नहीं है, तो वे ‘ऑटोमैटिक रूट’ से निवेश कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें पहले सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।

हालांकि, यह छूट हर किसी के लिए नहीं है। अगर कोई कंपनी सीधे तौर पर चीन, हांगकांग या किसी अन्य सीमावर्ती देश में रजिस्टर्ड है, तो उसे निवेश के लिए अभी भी सरकार की मंजूरी लेनी होगी। बेनिफिशियल ओनरशिप की पहचान अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग रूल्स 2005 के आधार पर की जाएगी।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए क्या खास सुविधा आई है?

सरकार ने कुछ चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 60 दिनों का फास्ट-ट्रैक अप्रूवल प्रोसेस शुरू किया है। जिन निवेश प्रस्तावों को सरकारी मंजूरी की जरूरत है, उन्हें अब तय समय सीमा में निपटाया जाएगा। इसमें इलेक्ट्रॉनिक सामान, कैपिटल गुड्स, एडवांस्ड बैटरी कंपोनेंट्स और रेयर अर्थ मैग्नेट जैसे सेक्टर शामिल हैं। इसके अलावा, ऑटोमैटिक रूट से निवेश करने वाली कंपनियों को इसकी जानकारी DPIIT को देनी होगी।

विवरण पुराना नियम (2020) नया नियम (2026)
सीमावर्ती देशों का निवेश सभी के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी 10% या उससे कम हिस्सेदारी पर ऑटोमैटिक रूट
चीन/हांगकांग रजिस्टर्ड फर्म सरकारी मंजूरी जरूरी अभी भी सरकारी मंजूरी जरूरी
मंजूरी का समय (चुनिंदा सेक्टर) कोई तय समय सीमा नहीं 60 दिनों का फास्ट-ट्रैक प्रोसेस
बेनिफिशियल ओनरशिप आधार सामान्य जांच PML नियम 2005 के अनुसार
FY26 FDI अनुमान 90 अरब डॉलर
Invest India का लक्ष्य (2032) चीन के 116 अरब डॉलर निवेश को पार करना
रिपोर्टिंग आवश्यकता DPIIT को जानकारी देना अनिवार्य

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या चीन की कंपनियों के लिए अब निवेश करना आसान हो गया है?

केवल उन विदेशी कंपनियों के लिए आसान हुआ है जिनमें चीनी हिस्सेदारी 10% या उससे कम है। जो कंपनियां सीधे चीन या हांगकांग में रजिस्टर्ड हैं, उन्हें अभी भी सरकारी मंजूरी लेनी होगी।

फास्ट-ट्रैक अप्रूवल किन सेक्टरों को मिलेगा?

इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, कैपिटल गुड्स, एडवांस्ड बैटरी और रेयर अर्थ मैग्नेट जैसे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों को 60 दिनों के भीतर मंजूरी मिलने की सुविधा दी गई है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.