भारत सरकार ने विदेश में रहने वाले लोगों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना काफी आसान बना दिया है। अब केवल NRI या OCI ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी देश में रहने वाला व्यक्ति भारतीय कंपनियों के शेयर खरीद सकेगा। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) ने 12 जून 2026 को इन नए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है।
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इन बदलावों को ‘Foreign Exchange Management (Non-Debt Instruments) (Third Amendment) Rules, 2026’ कहा गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही बजट में इसका संकेत दिया था। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 13 जून 2026 को भुगतान और रिपोर्टिंग के नियमों में भी बदलाव किया है ताकि विदेशी निवेशकों को आसानी हो।
निवेश की सीमा और नए नियम
अब विदेश में रहने वाला कोई भी व्यक्ति भारतीय लिस्टेड कंपनियों के शेयर खरीद या बेच सकता है। पहले यह सुविधा मुख्य रूप से NRI और OCI तक सीमित थी, लेकिन अब इसे सभी विदेशी निवासियों (PROIs) के लिए खोल दिया गया है।
| विवरण | नया नियम/सीमा |
|---|---|
| पात्र निवेशक | सभी व्यक्ति जो भारत से बाहर रहते हैं (PROIs) |
| एक व्यक्ति की अधिकतम सीमा | कंपनी की कुल पूंजी का 10% (पहले 5% था) |
| कुल विदेशी निवेश सीमा | कंपनी की कुल पूंजी का 24% |
| अधिसूचना की तारीख | 12 जून 2026 |
| अतिरिक्त शेयर बेचने की समय सीमा | 5 ट्रेडिंग दिन |
| ब्रीच रिपोर्ट करने का समय | 7 ट्रेडिंग दिन |
| नियम का नाम | FEMA (Non-Debt Instruments) Third Amendment Rules, 2026 |
इन बातों का रखना होगा ध्यान
सरकार ने कुछ जरूरी शर्तें भी रखी हैं। अगर कोई व्यक्ति भारत की जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों का नागरिक है या वहां का निवासी है, तो उसे निवेश के लिए सरकार से पहले मंजूरी लेनी होगी। यह नियम भारत की FDI पॉलिसी के हिसाब से बनाए गए हैं।
यदि किसी निवेशक के पास तय सीमा से ज्यादा शेयर हो जाते हैं, तो उसे 5 ट्रेडिंग दिनों के भीतर अतिरिक्त शेयर बेचने होंगे। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो उस निवेश को FDI की श्रेणी में डाल दिया जाएगा और वह व्यक्ति उस कंपनी में दोबारा पोर्टफोलियो निवेश नहीं कर पाएगा।