India Fertilizer Crisis: खादों की किल्लत से भारत में मची हलचल, Gulf में तनाव का असर अब किसानों पर, सरकार ने बढ़ाई सब्सिडी
Gulf क्षेत्र में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने से भारत में खाद की कमी का खतरा बढ़ गया है। इससे देश की खेती और फूड सिक्योरिटी पर बुरा असर पड़ सकता है। किसान अब खाद की बढ़ती कीमतों और कमी को लेकर चिंतित हैं, जिससे खरीफ सीजन की बुआई पर असर पड़ने की आशंका है।
Gulf में क्या हुआ और भारत पर इसका क्या असर पड़ा?
फरवरी 2026 के अंत में Strait of Hormuz के बंद होने से पूरी दुनिया में खाद की सप्लाई रुक गई। इस रास्ते से दुनिया की लगभग एक-तिहाई खाद का व्यापार होता है। इसके बंद होने से खाद की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और जहाजों का आना-जाना 90 प्रतिशत तक गिर गया। जहाजों के बीमा का खर्च भी दस गुना बढ़ गया। हालांकि 8 अप्रैल 2026 को ceasefire के बाद रास्ता फिर से खुलने की उम्मीद है, लेकिन कृषि जानकारों का मानना है कि बुआई के समय तक काफी नुकसान हो चुका होगा।
भारत सरकार ने संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए?
सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि खाद का स्टॉक पर्याप्त है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात में तेजी लाने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। सरकार ने खाद संयंत्रों को प्राथमिकता दी है और सब्सिडी में भी बढ़ोतरी की है।
| तारीख | सरकार का फैसला/अपडेट |
|---|---|
| 6 मार्च 2026 | खाद के रिजर्व में 36.5% की बढ़ोतरी की जानकारी दी |
| 20 मार्च 2026 | घरेलू यूरिया उत्पादन में 23% की वृद्धि की घोषणा |
| 21 मार्च 2026 | यूरिया आयात 48.70 LMT से बढ़ाकर 89.30 LMT किया |
| 21 मार्च 2026 | DAP आयात 43.09 LMT से बढ़ाकर 60.16 LMT किया |
| 30 मार्च 2026 | खाद प्लांट को Priority Sector-2 में डाला गया |
| 4 अप्रैल 2026 | P&K खाद का रिकॉर्ड 15.76 LMT घरेलू उत्पादन हुआ |
| 12 अप्रैल 2026 | किसानों की मदद के लिए 465 मिलियन डॉलर सब्सिडी बढ़ाई |
विशेषज्ञों ने क्या सलाह दी है?
कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी ने बताया कि खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी का खर्च अब और बढ़ेगा। उन्होंने खाद के वितरण के लिए Direct Benefit Transfer (DBT) और राशनिंग जैसे सुझाव दिए हैं ताकि खाद की बर्बादी रुके। ICRISAT और ICRIER जैसे संस्थानों ने कहा है कि यह समय भारत के लिए चेतावनी जैसा है। उन्होंने सलाह दी है कि भारत को खाद के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करनी चाहिए और खेती में AI जैसी नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना चाहिए।