भारत में फाइनेंस जॉब मार्केट पर बड़ा संकट, सिर्फ 9 प्रतिशत युवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए खुद को मानते हैं तैयार.

वित्त बाजार में नौकरी की तैयारी कर रहे भारतीय युवाओं को लेकर एक हैरान करने वाली बात सामने आई है। हाल ही में आई Finance Talent Pulse 2026 की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में फाइनेंस की पढ़ाई कर रहे और सर्टिफिकेट पाने की चाह रखने वाले युवाओं में से सिर्फ 9 प्रतिशत लोगों को यह लगता है कि उनके पास आज के समय में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भरी नौकरी की दुनिया में मुकाबला करने लायक कौशल है। यह आंकड़ा दुनिया भर के आंकड़ों से बहुत अलग है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर करीब 67 प्रतिशत ग्रेजुएट्स का यह मानना है कि वे एआई के दौर की नौकरियों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इस अंतर को देखकर साफ पता चलता है कि भारतीय युवाओं के मन में अपनी तैयारी को लेकर बड़ा आत्मविश्वास कम है।
यह सर्वे SSEI के जरिए CFA, FRM और CA की तैयारी कर रहे 133 उम्मीदवारों के बीच किया गया था। इस सर्वे के डेटा से पता चलता है कि भारत के करीब 56 प्रतिशत युवा एआई और ऑटोमेशन को अपने करियर में एक बड़ी रुकावट मानते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि इसकी वजह से उन्हें अपनी पसंद की नौकरी पाने में बहुत मुश्किल होगी। यही हाल दुनिया भर का भी है, क्योंकि CFA Institute के सर्वे के अनुसार दुनिया के करीब 59 प्रतिशत युवा भी एआई को रोजगार के रास्ते में एक बड़ी चुनौती मानते हैं। इस बारे में अधिक जानकारी आप ANI News की रिपोर्ट में देख सकते हैं।
कामकाज में एआई का कम इस्तेमाल और ट्रेनिंग की कमी
अगर बात करें रोजमर्रा के कामकाज में एआई के इस्तेमाल की, तो भारतीय छात्रों में यह बहुत कम देखा गया है। सर्वे के मुताबिक सिर्फ 7 प्रतिशत युवा ही ऐसे हैं जो वित्तीय विश्लेषण या मॉडलिंग के लिए नियमित रूप से एआई टूल का उपयोग करते हैं। वहीं दूसरी हैरानी की बात यह है कि 42 प्रतिशत ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने कभी भी अपने पेशेवर वित्तीय काम में एआई का इस्तेमाल नहीं किया है। इसके अलावा, 26 प्रतिशत उम्मीदवारों ने यह माना है कि उनकी पढ़ाई या कोचिंग के सिलेबस में फाइनेंस में एआई के इस्तेमाल से जुड़े विषय या चैप्टर शामिल ही नहीं हैं।
जब इन युवाओं से पूछा गया कि उनके सामने अपने पेशेवर विकास को लेकर सबसे बड़ी चिंता क्या है, तो 42 प्रतिशत भारतीय युवाओं ने कहा कि उनके पास प्रैक्टिकल अनुभव या हाथ से काम करने का मौका नहीं होना सबसे बड़ी समस्या है। इसके बाद 35 प्रतिशत युवा वित्तीय मॉडलिंग को लेकर परेशान दिखे और 18 प्रतिशत युवा ऐसे थे जिनका पूरा ध्यान एआई टूल को सही से चलाने की कला सीखने पर था। इन सभी बातों के बारे में आप विस्तार से ANI Topic AI पेज पर पढ़ सकते हैं।
डिजिटल टैलेंट की कमी और आरबीआई गवर्नर का बयान
ये सारी बातें ऐसे समय में सामने आई हैं जब देश में डिजिटल काम करने वाले लोगों की भारी कमी चल रही है। भारत में इस समय टैलेंट की कमी का आंकड़ा 82 प्रतिशत है, जो दुनिया के औसत से 10 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें भी एआई की समझ और मॉडल बनाने जैसे काम सिखाना सबसे कठिन माना जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में FIBAC 2026 सम्मेलन के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी इस बात पर जोर दिया था कि वित्तीय क्षेत्र को एआई के रास्ते पर खुद से आगे बढ़ना होगा ताकि किसी भी तरह के जोखिम जैसे कि डेटा में भेदभाव या कुछ ही कंपनियों पर निर्भरता से बचा जा सके।
भारत के पास अपनी डिजिटल व्यवस्था जैसे UPI और ONDC का बड़ा फायदा जरूर है, लेकिन हालिया आंकड़े यह साफ बताते हैं कि आने वाले समय की金融 जरूरतों को पूरा करने के लिए तकनीकी शिक्षा और कौशल के बीच की इस बड़ी खाई को जल्द से जल्द भरना बहुत जरूरी है। इस बारे में और अधिक जानकारी ANI Topic India पर उपलब्ध है।