भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का कारोबार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 तक इस सेक्टर की कमाई 98.4 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। अब ये सेंटर सिर्फ काम पूरा करने वाली मशीन नहीं, बल्कि बड़ी कंपनियों के मुख्य कंट्रोल सेंटर बन रहे हैं।

भारत में GCC का मौजूदा हाल और विकास क्या है?

अभी भारत में 2117 GCCs हैं जो 3,728 यूनिट्स के जरिए काम कर रहे हैं। इनमें करीब 23.6 लाख प्रोफेशनल काम कर रहे हैं। साल 2021 के मुकाबले सेंटर्स की संख्या में 32% की बढ़ोतरी हुई है। Forbes Global 2000 की करीब 506 कंपनियां भारत में अपना कामकाज चला रही हैं। 96% नए सेंटर्स अब किसी खास प्रोडक्ट या पोर्टफोलियो पर फोकस कर रहे हैं।

AI और सरकारी नीतियों का क्या असर दिख रहा है?

Nasscom के प्रेसिडेंट Rajesh Nambiar ने बताया कि AI इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभा रहा है। 1,200 से ज्यादा सेंटर्स में AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल हो रहा है, जिसमें 2.5 लाख एक्सपर्ट्स काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों ने भी इसके लिए खास कदम उठाए हैं:

  • Karnataka: GCC पॉलिसी 2024-2029 के तहत 2029 तक 500 नए GCC और 3.5 लाख नौकरियां लाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • Tamil Nadu: बड़ी कंपनियों के लिए पेरोल सब्सिडी स्कीम शुरू की गई है ताकि हाई-पेइंग नौकरियां बढ़ सकें।
  • Maharashtra: GCC पॉलिसी 2025 के जरिए 50,600 करोड़ रुपये का निवेश और 4 लाख हाई-स्किल्ड नौकरियां लाने की तैयारी है।

GCC सेक्टर की कमाई और भविष्य के आंकड़े

Nasscom-Zinnov की रिपोर्ट के अनुसार मार्केट की ग्रोथ और भविष्य के अनुमान नीचे दी गई टेबल में देखे जा सकते हैं:

विवरण आंकड़ा या अनुमान
FY2024 की सालाना कमाई 64.6 अरब डॉलर
FY2026 तक अनुमानित कमाई 98.4 अरब डॉलर
2030 तक संभावित कमाई 99-105 अरब डॉलर
2035 तक संभावित कमाई 155.24 अरब डॉलर
कुल कार्यरत प्रोफेशनल 23.6 लाख
AI आधारित सेंटर्स 1,200 से ज्यादा
CAGR (पिछले 4 साल) 9.8%

Frequently Asked Questions (FAQs)

भारत में GCC क्या होता है?

GCC का मतलब ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर है। ये विदेशी कंपनियों के ऐसे ऑफिस होते हैं जो भारत से उनके पूरी दुनिया के बिजनेस ऑपरेशंस और टेक्निकल काम को मैनेज करते हैं।

AI इस सेक्टर को कैसे बदल रहा है?

AI की वजह से अब ये सेंटर केवल सपोर्ट काम नहीं कर रहे, बल्कि नए प्रोडक्ट बना रहे हैं। 1,200 से ज्यादा सेंटर्स में अब AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल हो रहा है।