India GCC News: भारत के ग्लोबल सेंटर में टैलेंट की भारी कमी, खतरे में पड़ी कंपनियों की नई योजनाएं और प्रोजेक्ट्स.

Praggya Singh sabal15 August 20262 min read73 viewsIndia
India GCC News: भारत के ग्लोबल सेंटर में टैलेंट की भारी कमी, खतरे में पड़ी कंपनियों की नई योजनाएं और प्रोजेक्ट्स.

भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCC सेक्टर के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है और काम करने वाले अच्छे लोगों की कमी के कारण देश की साख पर सवाल उठने लगे हैं। PwC India और FICCI की तरफ से जारी की गई एक साझा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि टैलेंट की कमी के चलते दुनियाभर की बड़ी कंपनियों के हेडक्वार्टर अब भारत से काम हटाकर दूसरी जगहों पर ले जाने के बारे में सोच रहे हैं। इस सर्वे में आठ अलग-अलग सेक्टर के 200 सीनियर अधिकारियों से बातचीत की गई है जिसके बाद यह डरावनी तस्वीर सामने आई है।

टैलेंट की कमी से हो रहा है बड़ा नुकसान

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 11 प्रतिशत जीसीसी लीडर्स ने माना है कि उनके ग्लोबल हेडक्वार्टर अब भारत की बजाय दूसरे देशों में अपने प्रोजेक्ट भेजने पर विचार कर रहे हैं। इस समस्या की वजह से कंपनियों को हर साल होने वाले मुनाफे में 10 प्रतिशत तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। आने वाले साल 2030 तक इस सेक्टर के भविष्य का लगभग 19.3 प्रतिशत हिस्सा खतरे में पड़ सकता है, खासकर तब जब सभी कंपनियां तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की तरफ बढ़ रही हैं और उन्हें ऐसे काम के लिए स्मार्ट लोगों की जरूरत है।

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काम में हो रही है देरी

इस सर्वे से यह भी पता चला है कि लगभग 60 प्रतिशत जीसीसी को टैलेंट न मिलने के कारण नए प्रोडक्ट बाजार में उतारने और प्रोजेक्ट समय पर पूरा करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा 54 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उन्हें डिजिटल दुनिया में आगे बढ़ने वाले कार्यक्रमों को लागू करने में परेशानी आ रही है। काम करने वाले लोगों की इस कमी ने कंपनियों की रफ्तार को धीमा कर दिया है और समय पर काम पूरा नहीं हो पा रहा है।

बजट बढ़ाने पर हो रहा है विचार

इन तमाम परेशानियों से निपटने के लिए करीब 94 प्रतिशत बड़े अधिकारियों ने इस बात का समर्थन किया है कि टैलेंट पर खर्च होने वाले बजट को दोगुना किया जाना चाहिए। इसे ऑपरेटिंग कॉस्ट के 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने की बात कही गई है। रिपोर्ट में यह भी जोर दिया गया है कि आने वाले तीन सालों में लगभग आधे यानी 50 प्रतिशत कर्मचारियों को नए सिरे से ट्रेनिंग देने की जरूरत पड़ेगी ताकि वे आधुनिक तकनीक के हिसाब से काम कर सकें। इस पूरी रिसर्च के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए आप ANI News की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

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