रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने 21 से 23 अप्रैल 2026 तक जर्मनी का आधिकारिक दौरा किया। उन्होंने वहां की बड़ी कंपनियों को भारत के साथ मिलकर आधुनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी बनाने का न्योता दिया। भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि उन्हें खुद डिजाइन और तैयार करना चाहता है ताकि देश की सुरक्षा और मजबूत हो सके।

भारत-जर्मनी पनडुब्बी डील और 8 अरब डॉलर का समझौता

इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि 8 अरब डॉलर का समझौता है। यह डील Project-75 India के तहत हुई है, जिसमें जर्मनी की कंपनी ThyssenKrupp Marine Systems (TKMS) और भारत की Mazagon Dock Shipbuilders (MDL) साथ मिलकर काम करेंगे। इस समझौते का मुख्य फोकस तकनीक के ट्रांसफर और भारत में ही पनडुब्बियों के निर्माण पर है। राजनाथ सिंह ने कील शहर में TKMS की फैसिलिटी का दौरा किया और वहां Type 212 पनडुब्बी का मुआयना भी किया।

किन खास तकनीकों पर होगा काम और क्या है लक्ष्य

भारत ने जर्मनी से कुछ खास और आधुनिक तकनीकों में सहयोग मांगा है। इनमें एडवांस रडार, AI-आधारित ड्रोन (UAS), Sonobuoys और पानी के नीचे काम करने वाले हाई पावर ट्रांसमीटर शामिल हैं। राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना चाहता है और डिफेंस सेक्टर इस लक्ष्य का अहम हिस्सा है। सरकार Aatmanirbhar Bharat के तहत एक ऐसा मॉडल बना रही है जहां भारत डिजाइन और उत्पादन में एक ग्लोबल पार्टनर बने।

दौरे के दौरान हुए अन्य अहम समझौते

रक्षा मंत्री ने जर्मनी के रक्षा मंत्री Boris Pistorius के साथ मुलाकात की और कई अहम मुद्दों पर बात की। इस दौरान दोनों देशों ने Defence Industrial Cooperation Roadmap और UN शांति सेना की ट्रेनिंग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से दोनों देशों के बीच सैन्य ट्रेनिंग और क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलते वैश्विक हालातों और सप्लाई चेन की दिक्कतों को देखते हुए भरोसेमंद साझेदारियां बहुत जरूरी हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.