वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की नई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत में सोने की कुल मांग में 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान कुल सोने की खपत 131.4 टन रही। हालांकि, सोने की कीमतों में भारी उछाल के कारण इसकी खरीद का कुल मूल्य पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये (लगभग 23.89 अरब डॉलर) के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है।

मांग घटने के पीछे के कारण

सोने की बिक्री कम होने के मुख्य कारणों में सरकार का फैसला है। 13 मई 2026 को सरकार ने सोने पर आयात शुल्क (import duty) बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया। इसमें 3 फीसदी GST जोड़ने के बाद कुल टैक्स का अंतर 18 फीसदी हो गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के क्षेत्रीय सीईओ सचिन जैन के अनुसार, इस बढ़े हुए टैक्स की वजह से ग्रे मार्केट यानी अवैध सोने का कारोबार बढ़ गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 13 मई से 30 जून के बीच सोने की जब्ती के मामले पहले के मुकाबले लगभग दोगुने हो गए हैं। इसके अलावा, गहनों की मांग में 15 फीसदी की गिरावट आई और 75.1 टन रह गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गैर-जरूरी सोने की खरीदारी कम करने की अपील का भी बाजार पर असर पड़ा है।

पुराने सोने से मिल रही राहत

बाजार में नए सोने की मांग भले ही कम हुई हो, लेकिन पुराने सोने को बेचने (रीसाइक्लिंग) का चलन 60 फीसदी बढ़ गया है, जो कि 75,819 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राशि नए सोने की गिरती मांग की भरपाई में मददगार साबित हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की वरिष्ठ विश्लेषक लुईस स्ट्रीट ने कहा कि साल के बाकी बचे महीनों में निवेश के लिए सोने की मांग बनी रहेगी और पूरे साल के लिए भारत में सोने की मांग 650 से 750 टन के बीच रहने का अनुमान है। उपभोक्ता अब भारी गहनों के बजाय हल्के वजन के गहने खरीदने या पुराने सोने के बदले नया सोना लेने जैसे तरीके अपना रहे हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.