भारतीय सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के अपने असली मकसद को साफ़ कर दिया है। सरकार ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य पेट्रोल की कीमतों को कम करना नहीं, बल्कि दूसरे देशों से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करना है। इस जानकारी के सामने आने के बाद अब आम जनता के बीच सरकार की इस पॉलिसी को लेकर काफी चर्चा हो रही है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 जुलाई 2026 को बताया कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो एथेनॉल बनाना और उसे पेट्रोल में मिलाना कच्चे तेल के आयात से ज्यादा महंगा पड़ता है। इसका मतलब यह है कि एथेनॉल मिलाने के बावजूद ईंधन की कुल लागत कम नहीं होती है। अगर कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच जाए, तब जाकर एथेनॉल सस्ता पड़ेगा।

सरकार ने बताया कि देश में अब हर लीटर पेट्रोल में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा घरेलू एथेनॉल का होता है। 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग का यह लक्ष्य साल 2025-26 के दौरान समय से पहले ही पूरा कर लिया गया। अब एथेनॉल बनाने के लिए मक्के का इस्तेमाल बढ़ाया गया है, जो देश के कुल एथेनॉल उत्पादन में करीब 35 प्रतिशत योगदान देता है। मक्के से बने एथेनॉल की सरकारी खरीद दर जीएसटी और ट्रांसपोर्ट खर्च से पहले लगभग 71.86 रुपये प्रति लीटर है।

एथेनॉल प्रोग्राम से हुए फायदे

विवरण आंकड़े/फायदा
विदेशी मुद्रा की बचत 1.97 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा
कच्चे तेल की जगह एथेनॉल का इस्तेमाल 316 लाख मीट्रिक टन
कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी 952 लाख मीट्रिक टन
किसानों को मिला सीधा भुगतान 1.66 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा
मौजूदा ब्लेंडिंग स्तर 20 प्रतिशत
मक्के आधारित एथेनॉल की कीमत 71.86 रुपये प्रति लीटर
कुल उत्पादन में मक्के की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत

गाड़ियों पर असर को लेकर मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल) के लिए बड़े स्तर पर ट्रायल किए गए। कारों के लिए 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों के लिए 20,000 किलोमीटर तक टेस्ट किया गया, जिसमें कोई बड़ा नुकसान नहीं मिला। Maruti Suzuki और Hero MotoCorp जैसी कंपनियों ने भी पुष्टि की है कि उनकी गाड़ियों के पुर्जों में कोई जंग या घिसावट जैसी समस्या नहीं देखी गई है।

यह प्रोग्राम साल 2001 में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ था, जिसे 2004 में औपचारिक रूप से घोषित किया गया। 2006 तक E5 यानी 5 प्रतिशत ब्लेंडिंग लागू हो गई थी और जनवरी 2013 में इसकी पूरी पॉलिसी फ्रेमवर्क जारी किया गया था।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.