भारत सरकार अब रसोई गैस यानी LPG की कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है. अब होटलों, एयरपोर्ट और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल ठिकानों पर खाना बनाने के लिए इथेनॉल का इस्तेमाल करने की तैयारी है. सरकार का लक्ष्य विदेशी गैस पर अपनी निर्भरता कम करना और देश में बने इथेनॉल का सही उपयोग करना है.
इथेनॉल का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?
भारत अपनी रसोई गैस की 60% जरूरत आयात यानी दूसरे देशों से मंगवाने पर निर्भर है. दुनिया के हालात और सप्लाई चेन में दिक्कत की वजह से LPG का संकट खड़ा हो सकता है. इसी वजह से सरकार अब घरेलू इथेनॉल को विकल्प के तौर पर देख रही है. इससे न केवल विदेशों को जाने वाला पैसा बचेगा, बल्कि देश के अंदर बने अतिरिक्त इथेनॉल का भी इस्तेमाल हो सकेगा.
व्यापार और आम आदमी पर क्या होगा असर?
इथेनॉल का इस्तेमाल कमर्शियल LPG के मुकाबले काफी सस्ता पड़ेगा. जहाँ कमर्शियल LPG का दाम 103 रुपये प्रति किलो है, वहीं इथेनॉल मात्र 70 रुपये प्रति किलो के आसपास पड़ेगा. हालांकि, इसे घर-घर पहुँचाने और इसके लिए सुरक्षित चूल्हे बनाने पर अभी काम चल रहा है. IIT और LERC जैसे संस्थान नए चूल्हों के मॉडल तैयार कर रहे हैं ताकि सुरक्षा में कोई कमी न रहे.
सरकार की योजना और आगे की तैयारी
17 अप्रैल 2026 तक सरकार ने एक पैनल बनाया है जो इस पूरी योजना पर अंतिम फैसला लेगा. इसमें पेट्रोलियम, सड़क परिवहन और खाद्य मंत्रालय जैसे विभाग शामिल हैं. सरकार करीब 1,000 करोड़ लीटर अतिरिक्त इथेनॉल को खाना बनाने के काम में लगाने की सोच रही है. इसके लिए BIS और पेट्रोलियम मंत्रालय सुरक्षा के कड़े नियम बनाएंगे.
| तारीख और संस्था | मुख्य जानकारी |
|---|---|
| 20 मार्च 2026 | ISMA ने PMO को प्रस्ताव दिया और 8,000 करोड़ की बचत का दावा किया |
| 24 मार्च 2026 | खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने इथेनॉल विकल्पों पर काम की पुष्टि की |
| 24 मार्च 2026 | FIPI ने इथेनॉल को साफ ईंधन के रूप में विकसित करने की बात कही |
| 13 अप्रैल 2026 | AIDA ने सरकार से इथेनॉल के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने को कहा |
| 17 अप्रैल 2026 | मंत्रालयों का पैनल इथेनॉल प्रस्ताव पर फैसला लेगा |
| कीमत तुलना | इथेनॉल 70 रुपये/किलो बनाम LPG 103 रुपये/किलो |
| उत्पादन अपडेट | देश में घरेलू LPG उत्पादन में 40% की बढ़ोतरी हुई है |