भारत में घरों में पड़ा 700 अरब डॉलर का सोना देश की तरक्की में काम आ सकता है, Nilesh Shah ने किया सोने को निवेश में बदलने का सुझाव

भारत के घरों में बहुत सारा सोना बेकार पड़ा रहता है जिसे लोग अक्सर तिजोरियों में बंद करके रखते हैं। Kotak Mahindra AMC के मैनेजिंग डायरेक्टर Nilesh Shah ने कहा है कि अगर इस सोने को सही तरीके से अर्थव्यवस्था में लाया जाए तो यह देश की तरक्की के लिए एक बड़ा इंजन बन सकता है। उन्होंने करीब 700 अरब डॉलर के सोने को निवेश में बदलने की अपील की है।

सोने के इस्तेमाल से देश को क्या फायदा होगा?

Nilesh Shah ने बताया कि भारत हर साल करीब 1,000 टन सोने का आयात करता है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा लोगों के पास बिना किसी काम के पड़ा रहता है। उनका मानना है कि अगर इस बेकार पड़े सोने और चांदी को सरकारी योजनाओं के जरिए औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाया जाए, तो इससे सरकार के पास संसाधन बढ़ेंगे। इससे देश में निवेश बढ़ेगा और बुनियादी ढांचे का विकास होगा जिससे आम आदमी को भी फायदा मिलेगा।

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम और सरकारी नियमों में क्या बदलाव हुए?

भारत सरकार ने सोने से जुड़ी योजनाओं में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च 2025 से गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) के मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट घटकों को बंद कर दिया है। इसके साथ ही, वित्तीय वर्ष 2025-26 से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) जारी करना भी बंद कर दिया गया है। हालांकि, बैंकों में 1 से 3 साल वाली शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट की सुविधा अभी जारी रहेगी, लेकिन यह पूरी तरह बैंकों के अपने फैसले पर निर्भर करेगा।

सोने के मोनेटाइजेशन से जुड़ी मुख्य जानकारियां

विवरण जानकारी
घरों में पड़ा बेकार सोना करीब 700 अरब डॉलर
भारत का सालाना गोल्ड आयात 1,000 टन
GMS के तहत जुटा सोना (नवंबर 2024 तक) 31,164 किलोग्राम
MLTGD स्कीम बंद होने की तारीख 26 मार्च 2025
शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट की अवधि 1 से 3 साल
Sovereign Gold Bonds (SGB) बंद वित्तीय वर्ष 2025-26 से
विशेषज्ञ का सुझाव Nilesh Shah (Kotak Mahindra AMC)