India IPO Market: भारत ने रचा इतिहास, एक साल में कंपनियों ने जुटाए 1.8 लाख करोड़ रुपये, छोटे IPO की रफ्तार हुई धीमी
भारत के शेयर बाज़ार के लिए साल 2025-26 (FY26) बहुत बड़ा रहा. इस दौरान कंपनियों ने IPO के ज़रिए रिकॉर्ड 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो अब तक का सबसे ज़्यादा आंकड़ा है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की रिपोर्ट में बताया गया है कि जहाँ बड़ी कंपनियों ने खूब पैसा कमाया, वहीं छोटे और मध्यम उद्योगों (SME) के IPO में थोड़ी गिरावट देखी गई.
IPO बाज़ार में कितना पैसा आया और क्या रहा हाल?
इस साल मुख्य बोर्ड (Mainboard) पर आने वाली कंपनियों ने सबसे ज़्यादा पैसा जुटाया. रिपोर्ट के मुताबिक, 108 बड़ी कंपनियों ने मिलकर 1.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो कि अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. दूसरी तरफ, SME सेगमेंट में थोड़ी सुस्ती रही. यहाँ IPO की संख्या में 32 प्रतिशत और जुटाए गए फंड में 25 प्रतिशत की कमी आई.
| विवरण | आंकड़े (FY26) |
|---|---|
| कुल फंड जुटाया गया | 1.8 लाख करोड़ रुपये |
| कुल लिस्ट हुई कंपनियां | 219 |
| मुख्य बोर्ड (Mainboard) IPO | 108 कंपनियां (1.7 लाख करोड़ रुपये) |
| SME IPO | 111 कंपनियां (5,363 करोड़ रुपये) |
| औसत लिस्टिंग गेन | 8 प्रतिशत |
| औसत रिटर्न | -7 प्रतिशत (नेगेटिव) |
| बाज़ार पूंजीकरण में योगदान | 12.5 लाख करोड़ रुपये |
SEBI के नियमों में क्या बदलाव हुए और निवेशकों का क्या हाल रहा?
सेबी (SEBI) ने अब कंपनियों के लिए नियमों को पहले से ज़्यादा आसान बना दिया है. पहले बहुत सारे आवेदन रिजेक्ट होते थे, लेकिन इस साल सिर्फ 2 ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट्स वापस किए गए. सेबी अब कंपनियों को सवालों के जवाब देने के लिए ज़्यादा समय दे रहा है. साथ ही, कंपनियां अब अपने IPO का साइज़ 50 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं, जिसके लिए उन्हें दोबारा काग़ज़ जमा करने की ज़रूरत नहीं होगी.
निवेशकों के बीच अब पहले जैसा जोश नहीं दिख रहा है. पहले 72 प्रतिशत IPO को 10 गुना से ज़्यादा सब्सक्रिप्शन मिलता था, जो अब गिरकर 56 प्रतिशत रह गया है. रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी भी कम हुई है. हालांकि, इस बार म्यूचुअल फंड्स सबसे बड़े एंकर इन्वेस्टर बनकर उभरे हैं और उन्होंने विदेशी निवेशकों (FPIs) को पीछे छोड़ दिया है.
अगले साल के लिए क्या तैयारी है और क्या चुनौतियाँ हैं?
अगले साल (FY27) के लिए भी बहुत सारी कंपनियां तैयार बैठी हैं. करीब 144 कंपनियों को सेबी से मंज़ूरी मिल चुकी है, जो लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं. इसके अलावा 63 और कंपनियां मंज़ूरी का इंतज़ार कर रही हैं. प्राइम्स डेटाबेस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रणव हलद्या ने बताया कि भारत ने लगातार दो साल रिकॉर्ड फंड जुटाया है.
इतनी ज़्यादा कंपनियों के इंतज़ार में होने के बावजूद, बाज़ार में उतार-चढ़ाव और दुनिया के हालातों की वजह से कुछ कंपनियां अपना IPO टाल रही हैं. कई बड़े IPO अब अपनी इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं, जिसकी वजह से कंपनियां सावधानी बरत रही हैं.