भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में बड़ी जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि ईरान के साथ सीधी बातचीत का असर दिख रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करने पर काम चल रहा है. इस कूटनीतिक बातचीत के बाद भारत के कुछ तेल और गैस जहाजों को वहां से निकलने की अनुमति मिल गई है.

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ईरान के साथ बातचीत में क्या हुआ

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद से भारत लगातार ईरान के संपर्क में है. विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ अब तक चार बार फोन पर बातचीत की है. 10 मार्च 2026 को दोनों नेताओं के बीच जहाजों की सुरक्षा को लेकर लंबी चर्चा हुई थी. इसके बाद 12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बात की. जयशंकर ने बताया कि वे लगातार ईरान के संपर्क में हैं और इस बातचीत के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं.

कौन से भारतीय जहाजों को निकलने की मिली मंजूरी

भारत की इस कोशिश के बाद कुछ जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल गया है. 13 मार्च 2026 को भारत के दो एलपीजी (LPG) जहाज, शिवालिक और नंदा देवी को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई. इसके अलावा 15 मार्च को भारतीय तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ 80,800 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर यूएई के फुजैरा (Fujairah) से भारत के लिए रवाना हुआ. ईरान के राजदूत मोहम्मद फतह अली ने भी पुष्टि की है कि उन्होंने कुछ जहाजों को गुजरने दिया है. हालांकि जयशंकर ने यह भी साफ किया है कि अभी सभी भारतीय जहाजों के लिए कोई स्थायी समझौता नहीं हुआ है और व्यवस्थाओं पर काम चल रहा है.

भारत के लिए होर्मुज का रास्ता क्यों जरूरी है

होर्मुज का यह रास्ता भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. भारत अपना लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत से ज्यादा एलएनजी (LNG) और 90 प्रतिशत एलपीजी (LPG) इसी रास्ते से मंगाता है. दुनिया भर का लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार इसी जगह से होता है. अगर यह रास्ता बंद रहता है तो आम आदमी के लिए पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर असर पड़ सकता है. इसलिए भारत सरकार इस रास्ते को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है.