भारत और ईरान के बीच ऊर्जा संबंधों को फिर से मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। दोनों देशों के तेल मंत्रियों ने मुलाकात कर इस बात पर चर्चा की कि कैसे ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जा सकता है। यह बैठक भारत में आयोजित 11वें BRICS ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई।

ईरान के तेल मंत्री Mohsen Paknejad ने भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri और केंद्रीय बिजली मंत्री Manohar Lal से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने और नए रास्तों को तलाशने पर सहमति जताई। ईरान के मंत्री ने कहा कि ईरान भारत के साथ आर्थिक और ऊर्जा संबंध मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है और दोनों देशों के बीच पुराने ऐतिहासिक संबंध रहे हैं।

इस बातचीत के पीछे एक बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता है। पिछले हफ्ते दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते के बाद अमेरिका ने ईरानी ऊर्जा उत्पादों के निर्यात के लिए एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है।

अमेरिका द्वारा दी गई छूट की मुख्य बातें:

  • यह छूट 21 अगस्त तक मान्य है।
  • इसके तहत ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स का उत्पादन, बिक्री और आयात किया जा सकेगा।
  • बैंकिंग, बीमा और शिपिंग सेवाओं की अनुमति दी गई है।
  • भुगतान अमेरिकी डॉलर में करने की सुविधा मिलेगी।

आपको बता दें कि भारत पहले ईरान से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था। एक समय पर भारत के कुल तेल आयात का 11.5% हिस्सा ईरान से आता था, लेकिन 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने इसे रोक दिया था। अब प्रतिबंधों में मिली इस राहत के बाद भारतीय तेल उद्योग में फिर से ईरान से तेल खरीदने पर विचार किया जा रहा है।

इस बीच, चीन की सरकारी रिफाइनरियां भी ईरान से तेल खरीदना शुरू करने पर विचार कर रही हैं। वहीं, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी Ghadir Nezamipour ने इस हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी।

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने यह साफ किया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अपनी संप्रभुता का पालन करता है और उसके फैसले पूरी तरह से राष्ट्रीय हित पर आधारित होते हैं।