भारत और ईरान के बीच रिश्तों को मजबूत करने के लिए दिल्ली में एक अहम मुलाकात हुई। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने कई जरूरी मुद्दों पर बात की। यह मुलाकात New Delhi में हो रहे BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई जो 14 और 15 मई 2026 को आयोजित की गई थी।

बैठक में किन बड़े मुद्दों पर हुई बात?

दोनों मंत्रियों ने आपसी रिश्तों, क्षेत्रीय हालात और दुनिया के साथ सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भारत को BRICS बैठक की मेजबानी के लिए शुक्रिया कहा। उन्होंने Jaishankar को चल रहे 40 दिनों के युद्ध और वहां लगी नाजुक सीजफायर (ceasefire) की जानकारी दी। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने Strait of Hormuz और समुद्री सुरक्षा को लेकर भी अपने विचार साझा किए।

भारत और ईरान का क्या रहा रुख?

भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने के पक्ष में है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि Strait of Hormuz और Red Sea जैसे समुद्री रास्तों का बिना किसी रुकावट के खुला रहना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री ने BRICS देशों से अपील की कि वे अमेरिकी और इजराइली हमलों की निंदा करें। ईरान ने यह भी कहा कि युद्ध का कोई सैन्य हल नहीं है और उनका देश कूटनीति के लिए तैयार है।

व्यापार और चाबहार पोर्ट पर क्या अपडेट है?

बैठक से पहले ईरानी राजनयिक Mohammadreza Bahrami ने बताया कि भारत और ईरान के संबंध भूगोल और साझा हितों की वजह से बहुत जरूरी हैं। उन्होंने आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी बढ़ाने की बात कही, जिसमें Chabahar Port प्रोजेक्ट सबसे अहम है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने यह भी साफ किया कि ईरान के अन्य देशों के साथ संबंध कभी भी भारत के खिलाफ नहीं हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत द्विपक्षीय रिश्ते किसी तीसरे देश को निशाना बनाने के लिए नहीं होने चाहिए।

Frequently Asked Questions (FAQs)

भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों की मुलाकात कब और कहां हुई?

यह मुलाकात 15 मई 2026 को New Delhi में हुई, जो BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान आयोजित की गई थी।

बैठक के दौरान किन प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा हुई?

बैठक में Strait of Hormuz और Red Sea की समुद्री सुरक्षा, चल रहे 40 दिनों के युद्ध की स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर बात हुई।