ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए भारत अब सबसे बड़ी भूमिका में नजर आ रहा है। जहां एक ओर पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ दिखाने की कोशिश कर रहा था, वहीं असल में सीधी बातचीत भारत के माध्यम से शुरू हो चुकी है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई लंबी फोन कॉल ने इस संकट को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तुरंत बाद भारतीय विदेश मंत्री ने ईरानी राजदूत से भी दिल्ली में मुलाकात की है।

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच क्या बातचीत हुई?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 मार्च 2026 को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व की स्थिति पर गहराई से चर्चा की। ट्रंप ने खासतौर पर वैश्विक व्यापार और तेल की आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित और खुला रखने की बात कही। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी सोशल मीडिया पर इस कॉल की पुष्टि की है। भारत शुरू से ही चाहता है कि इस पूरे क्षेत्र में शांति बनी रहे और व्यापारिक जहाजों पर हमले न हों।

भारत की कूटनीति और जमीनी कार्रवाई की मुख्य बातें

भारत एक ही समय में दोनों पक्षों के साथ तालमेल बिठा रहा है, जो इसकी बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है। इस दौरान हुई मुख्य गतिविधियां इस प्रकार हैं:

  • ट्रंप-मोदी कॉल: 24 मार्च को ट्रंप ने मोदी से फोन पर सीधी और लंबी बात की।
  • जयशंकर की बैठक: उसी दिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली में ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली से मुलाकात की।
  • ऊर्जा सुरक्षा: बातचीत में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और पश्चिम एशिया में व्यापारिक सुरक्षा पर जोर दिया।
  • रूस की अपील: रूस ने भी भारत की प्रभावशाली स्थिति को देखते हुए इस संकट में मध्यस्थता करने की अपील की है।
  • पाकिस्तान का रुख: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत किसी पड़ोसी देश की तरह केवल दलाल के रूप में काम नहीं करेगा।

ईरान और अमेरिका के बीच ताजा हालात क्या हैं?

मौजूदा स्थिति को समझने के लिए नीचे दी गई जानकारी महत्वपूर्ण है:

विषय ताजा अपडेट
हमले की समय सीमा ट्रंप ने ईरान पर हमले की समय सीमा 10 दिनों के लिए बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 तक कर दी है।
ईरान का जवाब ईरान ने अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव को फिलहाल खारिज कर दिया है।
कतर की भूमिका कतर ने किसी भी सीधी मध्यस्थता से इनकार किया है और केवल शांति का समर्थन किया है।
मध्यस्थता प्रस्ताव खबरों के अनुसार ईरान ने पाकिस्तान और तुर्की के मध्यस्थता प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया है।

भारत का रुख हमेशा से बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाल करने का रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में किसी भी तरह की रुकावट व्यापार के लिए ठीक नहीं है। फिलहाल दुनिया की नजरें भारत के अगले कदम पर टिकी हैं क्योंकि रूस ने भी भारत की निर्णायक भूमिका को पहचाना है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com