भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से बड़ी संख्या में लोग इसराइल जा रहे हैं। इसराइल सरकार ने 2030 तक लगभग 6,000 लोगों को वहां बसाने की एक बड़ी योजना तैयार की है। हाल ही में इस अभियान के तहत पहला जत्था वहां पहुंच चुका है, लेकिन इस कदम के पीछे सरकार की असली मंशा को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
Operation Wings of Dawn क्या है और इसका लक्ष्य क्या है?
इस पूरी प्रक्रिया को आधिकारिक तौर पर ‘Operation Wings of Dawn’ का नाम दिया गया है। इस योजना को नवंबर 2025 में मंजूरी मिली थी। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2026 के अंत तक 1,200 लोग वहां पहुंचें और 2030 तक कुल 6,000 सदस्यों को इसराइल में बसाया जाए। इस पूरे काम के लिए 27 से 30 मिलियन डॉलर का बजट रखा गया है। इस पैसे का इस्तेमाल हवाई टिकट, हिब्रू भाषा की ट्रेनिंग, घर और नागरिकता के लिए जरूरी धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में किया जाएगा।
अब तक कितने लोग पहुंचे और उन्हें कहां रखा गया है?
इस नए अभियान के तहत करीब 240 से 250 लोगों का पहला समूह 23 और 24 अप्रैल 2026 को इसराइल पहुंचा। आने वाले दो हफ्तों के भीतर लगभग 600 और लोगों के वहां पहुंचने की उम्मीद है। ये लोग मुख्य रूप से भारत के मिजोरम और मणिपुर जैसे इलाकों से हैं। नए आने वाले लोगों को फिलहाल Nof Hagalil और उत्तरी इसराइल के अन्य शहरों में बने रिसेप्शन सेंटर्स में ठहराया गया है।
सरकार के इस फैसले पर क्या बोले बड़े नेता?
- प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इससे उत्तर और गैलील क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
- अलीया और इंटीग्रेशन मंत्री Ofir Sofer ने इसे एक ऐतिहासिक पल बताया और कहा कि हर साल 1,200 लोग इसराइल आएंगे।
- The Jewish Agency for Israel के चेयरमैन Doron Almog ने इन लोगों के प्रति समर्थन जताया और उन्हें बेहतर मौके देने की बात कही।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Bnei Menashe समुदाय के लोगों को नागरिकता कैसे मिलेगी?
नागरिकता पाने के लिए इन लोगों को औपचारिक रूप से यहूदी धर्म अपनाना होगा, जिसके लिए सरकार ने बजट में प्रावधान किया है।
इस पूरी योजना पर कितना पैसा खर्च होगा?
इसराइल सरकार ने फ्लाइट्स, ट्रेनिंग और आवास जैसी सुविधाओं के लिए 27 से 30 मिलियन डॉलर का अनुमानित बजट तय किया है।