ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए भारत और जापान ने एक साथ आने का फैसला किया है। दोनों देशों का मकसद यह है कि दुनिया के जरूरी समुद्री रास्तों से तेल और गैस की सप्लाई में कोई रुकावट न आए। जापान के प्रेस सचिव तोशिहिरो कितामुरा ने कहा कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई रुकी, तो यह दोनों देशों और पूरे इलाके के लिए बड़ा खतरा होगा।
16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हुए बड़े फैसले
2 जुलाई 2026 को हुए शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि दुनिया के व्यापार और ऊर्जा की सप्लाई के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना एक रणनीतिक जरूरत है।
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने कुछ नए कदम उठाए हैं:
- POWERR Asia: जापान की इस पहल के जरिए क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाया जाएगा।
- CBG Initiative: भारत और जापान ने बायोगैस उत्पादन बढ़ाने और साफ ऊर्जा के लिए ‘Cooperative Biogas for Growth’ पहल शुरू की है।
आर्थिक सुरक्षा और अन्य समझौते
दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणा पत्र भी जारी किया। इसके तहत पांच मुख्य क्षेत्रों में मिलकर काम किया जाएगा:
- सेमीकंडक्टर (Semiconductors)
- महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
- सूचना और संचार तकनीक (ICT)
- साफ ऊर्जा (Clean Energy)
- दवाइयां (Pharmaceuticals)
इसके अलावा, तेल के रणनीतिक भंडार और परिवहन को बेहतर बनाने पर भी सहमति बनी है ताकि भविष्य में ऊर्जा संकट से बचा जा सके।
ईरान-अमेरिका विवाद और भारत की चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून 2026 को एक समझौता (MoU) हुआ था, जिसमें ईरान ने 60 दिनों तक व्यापारिक जहाजों को मुफ्त और सुरक्षित रास्ता देने की बात कही थी। जापान ने इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि बातचीत जारी रहेगी।
वहीं, भारत ने ओमान की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों का विरोध किया है, जिसमें भारतीय नाविकों की जान गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने 1 जुलाई 2026 को ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेशकियन से बात कर शांति और समुद्री रास्तों को खुला रखने की अपील की थी।
