भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने मिलकर दुनिया के समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने की बात की है. 16वें India-Japan Annual Summit के दौरान दोनों नेताओं ने Strait of Hormuz में जहाजों की बेरोक-टोक आवाजाही को बहुत जरूरी बताया. उन्होंने साफ कहा कि ग्लोबल व्यापार के लिए समुद्री रास्ते खुले रहना बेहद जरूरी है.
समुद्री रास्तों पर पाबंदी का विरोध
2 जुलाई 2026 को खत्म हुए इस समिट में दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्र में जहाजों के चलने की आजादी होनी चाहिए. उन्होंने Strait of Hormuz में किसी भी ऐसी पाबंदी का विरोध किया जिससे व्यापारिक जहाजों के रास्ते में रुकावट आए. दोनों नेताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून UNCLOS के हिसाब से ही समुद्री रास्तों का इस्तेमाल होना चाहिए ताकि सभी देशों का व्यापार सुरक्षित रहे.
तेल और ऊर्जा की सप्लाई पर चर्चा
भारत और जापान दोनों ही देश अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों से तेल और ऊर्जा मंगवाते हैं. इसीलिए दोनों ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर आपसी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया. जापान अब भारत को अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserves) बनाने में मदद करेगा. साथ ही, जापान ने भारत के International Energy Agency (IEA) की सदस्यता के लिए अपना समर्थन दिया है.
जापान की चिंता और सुरक्षा इंतजाम
प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने खाड़ी क्षेत्र के हालात पर अपनी चिंता जताई. उन्होंने बताया कि करीब 31 जापानी जहाज Strait of Hormuz के पास फंसे हुए हैं. उन्होंने कहा कि अगर इस रास्ते से ऊर्जा और संसाधनों की सप्लाई रुकी, तो इसका बुरा असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
रक्षा और सैन्य सहयोग
सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत और जापान ने हिंद महासागर में मिलकर नौसेना अभ्यास करने पर सहमति जताई है. दोनों देश Maritime Domain Awareness (MDA) को बढ़ाएंगे ताकि समुद्र पर नजर रखी जा सके. इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में पहली बार एक साथ मिलकर नौसेना के लिए रेडियो एंटीना बनाने का प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है.
