Strait of Hormuz Maritime Initiative: भारत को मिला UK और फ्रांस का न्योता, अब जहाजों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करेंगे देश
भारत ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, Strait of Hormuz की सुरक्षा के लिए ब्रिटेन और फ्रांस की पहल में शामिल होने की बात कही है। विदेश मंत्रालय ने कन्फर्म किया है कि भारत इस मिशन का हिस्सा बनेगा ताकि तेल और व्यापार के जहाजों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए। इस मुहिम का मकसद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट को सुरक्षित बनाना है ताकि वैश्विक व्यापार पर कोई असर न पड़े।
यह नया मिशन क्या है और भारत इसमें क्यों शामिल हो रहा है?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने इस पहल की शुरुआत की है। इसका मुख्य मकसद Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने के रास्ते को सुरक्षित रखना है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने बताया कि भारत को इसका न्योता मिला है और वह इसमें हिस्सा लेगा।
यह रास्ता दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए बहुत जरूरी है, इसलिए इसकी सुरक्षा करना एक बड़ी वैश्विक जिम्मेदारी है। इस मिशन के तहत टैंकरों की सुरक्षा के लिए एक गठबंधन बनाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर समुद्री माइन्स को हटाने का काम भी किया जा सकता है। डाउनिंग स्ट्रीट के मुताबिक, यह पूरी तरह से एक रक्षात्मक सैन्य प्रयास होगा।
इस मिशन में कौन शामिल हैं और मौजूदा हालात क्या हैं?
इस पहल के लिए एक वर्चुअल समिट बुलाई गई है जिसमें करीब 40 देशों को आमंत्रित किया गया है। इसमें जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz भी शामिल हो रहे हैं। साथ ही International Maritime Organisation (IMO) भी नाविकों और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस बैठक का हिस्सा बना है।
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने 17 अप्रैल 2026 को कहा कि सीजफायर के दौरान Strait of Hormuz सभी कमर्शियल जहाजों के लिए खुला रहेगा। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ किया है कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक कि तेहरान के साथ कोई व्यापक शांति समझौता नहीं हो जाता।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तारीख | 17 अप्रैल 2026 |
| नेतृत्व करने वाले देश | UK और फ्रांस |
| आमंत्रित देश | भारत सहित लगभग 40 देश |
| मुख्य उद्देश्य | बिना रुकावट जहाजों का संचालन और सुरक्षा |
| IMO की भूमिका | नाविकों और जहाजों की सुरक्षा करना |
| ईरान का रुख | कमर्शियल जहाजों के लिए रास्ता खुला रखा |
| अमेरिका का रुख | ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रहेगी |