भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ब्रिटेन की बड़ी पहल में शामिल होने का फैसला किया है। 2 अप्रैल 2026 को ब्रिटेन की मेजबानी में हुई एक वर्चुअल समिट में भारत ने हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य मकसद समुद्री रास्ते को फिर से खोलना और ईरान की तरफ से पैदा की जा रही रुकावटों को दूर करना है। भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए सरकार लगातार कूटनीतिक रास्तों पर काम कर रही है।

इस पहल से भारत को क्या लाभ होगा?

भारत के लिए यह समुद्री रास्ता आर्थिक नजरिए से काफी अहम है क्योंकि इसी मार्ग से कच्चे तेल और गैस की भारी आपूर्ति होती है। भारत सरकार ने इस क्षेत्र में अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए ‘Operation Sankalp’ और ‘Operation Urja Suraksha’ जैसे अभियान पहले से ही चला रखे हैं। विदेश मंत्री S. Jaishankar लगातार ईरान के संपर्क में हैं ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके। अब इस अंतरराष्ट्रीय समूह में शामिल होने से भारतीय शिपिंग को ज्यादा मजबूती मिलेगी और व्यापार में आने वाली दिक्कतें कम होंगी।

इस मिशन में कौन-कौन से देश शामिल हैं?

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की तरफ से बुलाई गई इस बैठक में 35 देशों को आमंत्रित किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि इसमें अमेरिका सीधे तौर पर शामिल नहीं हो रहा है। इस पहल में शामिल कुछ मुख्य देशों के नाम नीचे दी गई तालिका में दिए गए हैं:

क्रम संख्या मुख्य सहभागी देश
1 भारत (India)
2 यूनाइटेड किंगडम (UK)
3 फ्रांस (France)
4 जर्मनी (Germany)
5 जापान (Japan)
6 संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
7 बहरीन (Bahrain)

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी से अब तक इस रास्ते से होने वाले व्यापार में 95 प्रतिशत की गिरावट आई है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समुद्री मार्ग को स्वतंत्र और सुरक्षित रखने को भारत की प्राथमिकता बताया है। इस मिशन के जरिए कोशिश की जा रही है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे बुरे असर को रोका जा सके और खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई को सुचारू रखा जाए।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.