भारत में इन दिनों सरकारी और निजी सेक्टरों में संसाधनों और पैसों के गायब होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। कोयला और परीक्षा के पेपर से लेकर मंदिर के चंदे और कंपनियों के करोड़ों रुपयों तक, कई मामलों ने लोगों का ध्यान खींचा है। इन घटनाओं ने प्रशासन और सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोयला और शिक्षा क्षेत्र में गड़बड़ी
केंद्रीय कोयला मंत्री G Kishan Reddy ने Singareni Collieries Company Ltd (SCCL) से करीब 40 लाख टन कोयले के गायब होने की बात कही है। इसकी कीमत लगभग 1,600 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मंत्री ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री A Revanth Reddy को पत्र लिखकर इस मामले की तुरंत जांच करने की मांग की है।
वहीं, NEET-UG 2024 परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों को परेशान किया। शुरुआत में NTA ने इन दावों को खारिज किया था, लेकिन बाद में CBI की जांच में कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि कुछ छात्र पेपर लीक से फायदा उठाए, लेकिन कोर्ट ने पूरे सिस्टम में किसी बड़ी विफलता के सबूत नहीं मिलने की बात कही।
बड़े वित्तीय घोटाले और आरोप
Rajesh Exports Limited पर बहुत बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप लगा है। SEBI ने एक अंतरिम आदेश में कहा कि कंपनी ने पिछले पांच सालों में अपनी कमाई को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया, जो करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये है। ED की जांच में विदेशी लेन-देन के रिकॉर्ड न मिलने और अफ्रीकी खानों में बिना दस्तावेज़ों के निवेश की बातें सामने आई हैं।
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में भी चंदे के पैसों की हेराफेरी का मामला सामने आया। आरोप है कि करीब 200 करोड़ रुपये के कैश और कीमती सामान गायब हैं। यूपी सरकार ने SIT बनाकर जांच शुरू की और 8 लोगों को गिरफ्तार किया। इस मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai और Trustee Anil Mishra ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।
प्रमुख वित्तीय और संसाधन संबंधी आंकड़ों की सूची
| मामला | कथित राशि या विवरण | संबंधित एजेंसी/निकाय |
|---|---|---|
| कोयला गायब होना (SCCL) | ₹1,600 करोड़ | केंद्रीय कोयला मंत्रालय |
| Rajesh Exports कमाई | ₹15.15 लाख करोड़ | SEBI और ED |
| राम मंदिर चंदा | ₹200 करोड़ | SIT (यूपी सरकार) |
| गायब EVM मशीनें | 20 लाख यूनिट | Election Commission |
| राम मंदिर (शुरुआती आरोप) | ₹7.5 करोड़ | SIT |
| Rajesh Exports शॉर्टफॉल | ₹30 बिलियन | ED |
EVM और अन्य जनहित मुद्दे
चुनाव आयोग (ECI) पर आरोप लगा कि 2016 से 2019 के बीच करीब 20 लाख EVM मशीनें गायब हो गईं। हालांकि, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट ने इन दावों को पूरी तरह से आधारहीन और गलत बताया है। आयोग का कहना है कि उनकी मशीनें पूरी तरह सुरक्षित और टेंपर-प्रूफ हैं।
इन सबके अलावा, आम जनता के बीच कुछ और चिंताएं भी हैं। लोगों का कहना है कि खेती में कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से खाने की पौष्टिकता कम हो रही है। साथ ही, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की वजह से गाड़ियों के माइलेज में कमी आई है, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ रहा है।
