भारत सरकार अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए उस नए बिल पर बारीकी से नजर रख रही है, जिसमें रूस से बड़े पैमाने पर ईंधन खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 31 जुलाई 2026 को साफ किया कि भारत अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर लगातार बात कर रहा है। सरकार का कहना है कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह से देश की जरूरतों पर आधारित है और अपनी 1.4 अरब की आबादी की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करना सबसे पहली प्राथमिकता है।

🚨: ईरान नाकेबंदी: अमेरिका ने रोके 30 कमर्शियल जहाज़, कुवैत में ड्रोन हमले से मची हलचल.

बिल का मुख्य उद्देश्य

इस बिल का नाम ‘द लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। इसे अमेरिकी सीनेट में 86-12 के भारी बहुमत से मंजूरी मिल चुकी है और अब यह हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में विचार के लिए जाएगा। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार मिलेगा कि वे उन देशों पर भारी टैक्स लगा सकें जो रूस से तेल या गैस खरीदते हैं या मॉस्को को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।

भारत का रुख और अन्य देश

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इन 100 प्रतिशत टैरिफ वाली खबरों को फिलहाल अटकलें बताया है। हालांकि, इस बिल की धारा 113 में भारत के अलावा चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों का भी जिक्र है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को हर 180 दिन में इस सूची की समीक्षा करने और टैरिफ दरों को बदलने का अधिकार दिया गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका सहित कई देशों से आयात का विकल्प खुला रखा हुआ है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com