भारत और नेपाल के बीच पुराना सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मामला कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) के इस्तेमाल को लेकर है। भारत ने इस रास्ते से यात्रा फिर से शुरू करने का ऐलान किया है, जिस पर नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताई है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर राजनयिक तनाव बढ़ गया है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा और विवाद की असल वजह क्या है?
भारत सरकार ने चीन के साथ तालमेल बिठाकर लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू करने का फैसला किया। यह यात्रा जून से अगस्त 2026 के बीच होगी। नेपाल ने इस फैसले पर विरोध जताते हुए भारत और चीन दोनों को राजनयिक नोट भेजे। नेपाल का कहना है कि लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी उसके इलाके का हिस्सा हैं और वह 1816 की सुगौली संधि (Sugauli Treaty) को इसका आधार मानता है।
भारत और नेपाल के दावों में क्या अंतर है?
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने नेपाल की आपत्तियों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि नेपाल के दावे ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं हैं। भारत का कहना है कि लिपुलेख दर्रा 1954 से ही यात्रा का एक पुराना रास्ता रहा है और यह कोई नई बात नहीं है। दूसरी तरफ, नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल छेत्री ने साफ किया कि ये इलाके नेपाल के अभिन्न अंग हैं। नेपाल ने भारत से अपील की है कि उसकी सहमति के बिना विवादित क्षेत्र में सड़क निर्माण या यात्रा जैसे काम न किए जाएं।
यात्रा से जुड़ी जरूरी शर्तें और नियम क्या हैं?
- पंजीकरण: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं और इसकी आखिरी तारीख 19 मई है।
- रूट: कुल 1,000 यात्री दो रास्तों से जाएंगे, एक उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा और दूसरा सिक्किम का नाथू ला दर्रा।
- जरूरी दस्तावेज: यात्रियों के पास 6 महीने की वैधता वाला भारतीय पासपोर्ट, चीनी ग्रुप वीजा और हाई-एल्टीट्यूड मेडिकल इंश्योरेंस होना जरूरी है।
- बैच: यात्रियों को 50-50 के बैच में भेजा जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
नेपाल ने अपना दावा किस आधार पर किया है?
नेपाल सरकार 1816 की सुगौली संधि को आधार मानती है। इसके मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल के क्षेत्र में आते हैं।
भारत सरकार का इस विवाद पर क्या रुख है?
भारत का कहना है कि लिपुलेख दर्रा 1954 से यात्रा के लिए इस्तेमाल हो रहा है और नेपाल के दावे गलत हैं। भारत ने बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए सीमा विवाद सुलझाने की बात कही है।