भारत और नेपाल के रिश्तों में एक बड़ी मजबूती आई है। नेपाल की संसद में दोनों देशों के बीच हुए एक खास कानूनी समझौते को पेश किया गया है। इस समझौते का मकसद अपराधियों को पकड़ना और आतंकवाद जैसी बड़ी मुश्किलों से मिलकर लड़ना है। अब दोनों देश कानूनी मामलों और जांच में एक-दूसरे की पूरी मदद करेंगे।

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इस नए समझौते से क्या बदलेगा और किन अपराधों पर होगी लगाम?

नेपाल की कानून मंत्री Sobita Gautam ने इस समझौते को संसद के सामने रखा है। इस pact का मुख्य उद्देश्य जांच प्रक्रिया को आसान बनाना और अपराधियों की संपत्ति को वापस लाना है। यह कानून मुख्य रूप से इन अपराधों पर वार करेगा:

  • आतंकवाद: आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए जानकारी साझा करना।
  • मानव तस्करी: सीमा पार होने वाली तस्करी को रोकना।
  • नशीली दवाओं की तस्करी: ड्रग्स के व्यापार पर लगाम लगाना।
  • मनी लॉन्ड्रिंग: काले धन को सफेद करने वाले गिरोहों को पकड़ना।

इस व्यवस्था से दोनों देशों की पुलिस और कोर्ट के बीच तालमेल बेहतर होगा जिससे कानूनी कार्रवाई तेजी से पूरी होगी।

कब हुआ यह समझौता और कौन-कौन से बड़े अधिकारी शामिल थे?

इस महत्वपूर्ण समझौते पर 18 फरवरी 2026 को हस्ताक्षर किए गए थे। नेपाल की कैबिनेट ने इसके लिए 16 अक्टूबर 2025 को ही मंजूरी दे दी थी। इस प्रक्रिया में कई बड़े अधिकारियों की भूमिका रही है:

  • Binod Kumar Bhattarai: नेपाल सरकार की ओर से इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • Naveen Srivastava: भारत के राजदूत ने भारतीय सरकार की तरफ से साइन किए।
  • Sobita Gautam: कानून मंत्री जिन्होंने इसे 7वें प्रतिनिधि सभा (Parliament) में पेश किया।
  • Anil Kumar Sinha: कानून मंत्री जो हस्ताक्षर समारोह के दौरान मौजूद थे।

FATF की ग्रे लिस्ट और पुराने समझौतों का क्या असर होगा?

नेपाल के अधिकारियों को उम्मीद है कि इस नए समझौते के बाद नेपाल को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर निकाला जा सकेगा। FATF वह अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर नजर रखती है। इससे पहले साल 2005 में भी भारत और नेपाल के बीच ऐसा ही एक समझौता और प्रत्यर्पण संधि हुई थी, जिसे अब आधुनिक बनाया गया है। नेपाल ने अक्टूबर 2019 में चीन के साथ भी इसी तरह का एक समझौता किया था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

यह समझौता क्यों किया गया है?

यह समझौता आतंकवाद, मानव तस्करी, ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों को रोकने के लिए किया गया है ताकि दोनों देश जांच और कानूनी कार्यवाही में एक-दूसरे की मदद कर सकें।

क्या इससे नेपाल को कोई अंतरराष्ट्रीय फायदा होगा?

जी हाँ, नेपाली अधिकारियों का मानना है कि इस कानूनी ढांचे के आने से नेपाल को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने में मदद मिलेगी।