भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने के लिए दूसरा रणनीतिक संवाद शुरू, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दिया मुख्य भाषण.

भारत और नेपाल के बीच आपसी रिश्तों को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से दूसरे भारत-नेपाल रणनीतिक संवाद का शानदार आगाज हुआ। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की शुरुआत में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें दोनों देशों की पुरानी दोस्ती और साझेदारी पर विशेष जोर दिया गया। इस आयोजन को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर चल रही हलचल साफ नजर आती है।
अनंता एस्पेन सेंटर और सीईएसआईएफ की ओर से हुआ आयोजन
यह पूरा संवाद कार्यक्रम संयुक्त रूप से अनंता एस्पेन सेंटर और सेंटर फॉर सोशल इनोवेशन एंड फॉरेन पॉलिसी द्वारा आयोजित किया गया था। इस मंच के माध्यम से भारत और नेपाल के बीच आपसी सहयोग को नई दिशा देने पर खुलकर चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वहां मौजूद कई नेपाली गणमान्य व्यक्तियों और युवा प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की और दोनों देशों के युवाओं की भूमिका को सराहा। प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने बताया कि भारत और नेपाल एक बहुत गहरी और बहुआयामी साझेदारी साझा करते हैं, जो समय के साथ और मजबूत होती जा रही है। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य इन्हीं रणनीतिक संबंधों को गहराई देना और आगे की संभावनाओं को तलाशना है।
भारतीय सेना प्रमुख का नेपाल दौरा और रक्षा सहयोग
इस बीच, कूटनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ रक्षा संबंधों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ 17 अगस्त से 19 अगस्त 2026 तक नेपाल के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को नेपाल के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री बलेंद्र शाह से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर अहम चर्चा की। नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने जनरल सेठ को 17 अगस्त 2026 को नेपाली सेना के मानद जनरल की उपाधि से सम्मानित किया, जो दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी सम्मान का प्रतीक है।
सीमा विवाद और द्विपक्षीय बातचीत पर जोर
इसके साथ ही, भारत और नेपाल के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक बुधवार, 19 अगस्त 2026 को भारत के देहरादून में शुरू हुई। यह दो दिवसीय बैठक दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और भारत-चीन व्यापार पर नेपाल के रुख को लेकर आयोजित की जा रही है। इस भारतीय प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने पहले ही स्पष्ट किया था कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा demarcated यानी सीमांकित किया जा चुका है। गंडक नदी के रास्ते बदलने और नो-मान्स लैंड पर अतिक्रमण जैसे अनसुलझे मामलों को सुलझाने के लिए पहले से ही द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं, और इन मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।