भारत सरकार ने टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ‘पर्सनल इनकम टैक्स एक्ट 2025’ लागू कर दिया है। यह कानून 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है, जिससे अब टैक्स भरना पहले के मुकाबले काफी सरल होगा। खास बात यह है कि दुबई और अन्य खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों (NRIs) के लिए इसमें कई राहतें दी गई हैं।

टैक्स सिस्टम में हुए बड़े बदलाव

सरकार ने पुराने 1961 के कानून को हटाकर यह नया कानून लाया है। इसका मुख्य मकसद टैक्स के नियमों को आधुनिक बनाना और कागजी कार्रवाई को कम करना है। अब टैक्स भरने वालों को पुराने और जटिल नियमों में नहीं उलझना पड़ेगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रिवियस ईयर’ जैसे शब्दों की जगह सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ (Tax Year) का इस्तेमाल होगा।

विवरण पुरानी व्यवस्था नई व्यवस्था (2025 एक्ट)
लागू होने की तारीख 1 अप्रैल 2026
कुल सेक्शन (Sections) 819 536
कुल चैप्टर (Chapters) 47 23
शब्दावली Assessment/Previous Year Tax Year
प्रभावी वित्तीय वर्ष 2026-27 से
राष्ट्रपति की मंजूरी 21 अगस्त 2025

NRIs और प्रवासियों के लिए क्या है खास

UAE और अन्य देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए यह कानून काफी फायदेमंद है। नए नियमों के मुताबिक, NRIs को भारत के बाहर कमाई गई अपनी इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। उन्हें सिर्फ उसी कमाई पर टैक्स देना होगा जो उन्होंने भारत में कमाई है या भारत में जमा की है।

NRIs के लिए कुछ अन्य मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • FCNR और NRE अकाउंट से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स की छूट जारी रहेगी।
  • अगर किसी NRI की कमाई सिर्फ निवेश या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन से है और उस पर TDS कट चुका है, तो उन्हें रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं होगी।
  • निवास स्थिति (Residential Status) के नियम वही रहेंगे, यानी साल में 182 दिन या उससे ज्यादा भारत रहने वालों को रेजिडेंट माना जाएगा।

दुबई कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों की राय

18 जून 2026 को दुबई में ‘टैक्स 360’ कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें 300 से ज्यादा अकाउंटिंग प्रोफेशनल्स शामिल हुए। UAE इंटरनल ऑडिटर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अब्दुलकादिर ओबेद अली ने कहा कि टैक्स ढांचे के सरल होने से अर्थव्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और मजबूत होती है। वहीं, ICAI के दुबई चैप्टर के चेयरमैन CA ऋषि चावला ने बताया कि यह नया सिस्टम तकनीक और पारदर्शिता पर आधारित है जो तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के अनुकूल है।

टैक्स एक्सपर्ट दीक्षित जैन ने UAE में रहने वाले भारतीयों को सलाह दी है कि वे वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपने दस्तावेज जल्द तैयार कर लें, ताकि रिटर्न फाइल करते समय किसी भी तरह की पेनल्टी या परेशानी से बचा जा सके।