भारत में तेजी से बढ़ती ई-कॉमर्स और डिलीवरी कंपनियों में काम करने वाले करोड़ों गिग वर्कर्स के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठा रही है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के नए नियमों के तहत इन कर्मचारियों को अब सामाजिक सुरक्षा, दुर्घटना बीमा और स्वास्थ्य कवरेज जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके साथ ही कंपनियों के लिए अपने कर्मचारियों का डेटा सरकारी पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि उन्हें योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।

नए नियम के तहत डिलीवरी और गिग वर्कर्स को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?

श्रम मंत्रालय के तहत सोशल सिक्योरिटी कोड के जरिए गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। सरकार इन कर्मचारियों को दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य कवरेज, मातृत्व सहायता और बुढ़ापे की सुरक्षा यानी पेंशन का लाभ देगी। इन योजनाओं को चलाने के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया गया है। इसमें स्विगी, जोमैटो जैसी एग्रीगेटर कंपनियों को अपने सालाना टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत हिस्सा योगदान के रूप में देना होगा, जो इन कर्मचारियों की भलाई के लिए खर्च होगा।

कंपनियों और कर्मचारियों के लिए क्या है आखिरी तारीख?

भारत सरकार ने सभी प्लेटफॉर्म और डिलीवरी कंपनियों को 22 जून 2026 तक अपने सभी वर्कर्स का डेटा ई-श्रम (e-Shram) पोर्टल पर जोड़ने का निर्देश दिया है। 16 साल या उससे अधिक उम्र के सभी गिग वर्कर्स आधार कार्ड की मदद से इस सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद उन्हें एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) मिलेगा, जिसके जरिए वे सभी सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। वर्तमान में भारत में करीब 1 करोड़ गिग वर्कर्स हैं, जिनके साल 2030 तक बढ़कर 2.5 करोड़ होने की उम्मीद है।

मौजूदा कानूनों में बदलाव की क्यों पड़ रही है जरूरत?

सरकारी अधिकारियों और नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पुराने श्रम कानून आज के दौर के ई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल के हिसाब से नहीं बने हैं। दत्तापंत ठेंगड़ी राष्ट्रीय श्रम शिक्षा और विकास बोर्ड (DTNBWED) के अध्यक्ष वीरजेश उपाध्याय ने कहा कि मौजूदा कानूनों को नए तरीके से तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि कंपनियों और कर्मचारियों के बीच विवादों के निपटारे के लिए एक मजबूत सिस्टम का होना बेहद जरूरी है। वहीं जेप्टो (Zepto) के पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर निखिल दहिया ने बताया कि इस सेक्टर में हर महीने 20 से 30 प्रतिशत कर्मचारी काम बदलते हैं, इसलिए इनके लिए एक स्थाई और मजबूत सामाजिक सुरक्षा ढांचा जरूरी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

गिग वर्कर्स को ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि क्या है?

सभी कंपनियों को अपने गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स का डेटा ई-श्रम पोर्टल पर एकीकृत करने के लिए 22 जून 2026 तक का समय दिया गया है।

कंपनियों को सोशल सिक्योरिटी फंड में कितना पैसा देना होगा?

सभी एग्रीगेटर कंपनियों को अपने सालाना टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत हिस्सा इस फंड में देना होगा, जो कि कर्मचारियों को किए जाने वाले कुल भुगतान के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

क्या 16 साल के युवा भी इसके लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं?

हाँ, 16 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारी अपने आधार कार्ड का उपयोग करके सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण करा सकते हैं।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.