भारत और न्यूज़ीलैंड ने एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता (FTA) साइन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूज़ीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा बताया है। इस समझौते से न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा, बल्कि भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए न्यूज़ीलैंड में नौकरी के नए मौके भी खुलेंगे। यह डील दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत करेगी।

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न्यूज़ीलैंड में नौकरी और वीज़ा के क्या हैं नए नियम?

इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड ने भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए रास्ते आसान कर दिए हैं। अब कुशल व्यवसायों में काम करने वाले भारतीयों के लिए कम से कम 5,000 ‘Temporary Employment Entry Visas’ दिए जाएंगे। इन वीज़ा पर भारतीय प्रोफेशनल्स न्यूज़ीलैंड में तीन साल तक रह सकेंगे। इसके अलावा, दवाइयों और मेडिकल उपकरणों के लिए Mutual Recognition Agreements (MRAs) किए गए हैं, जिससे भारतीय फार्मा कंपनियों के प्रोडक्ट्स को न्यूज़ीलैंड के बाज़ार में मंजूरी मिलना अब और तेज़ हो जाएगा।

व्यापार और निवेश से जुड़ी मुख्य बातें

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। न्यूज़ीलैंड अगले 15 सालों में भारत के टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगा। दोनों देशों ने अगले पांच सालों में आपसी व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

मुख्य बिंदु विवरण
भारतीय निर्यात आइटम 8,284 आइटम न्यूज़ीलैंड बाज़ार में 100% ड्यूटी फ्री होंगे
न्यूज़ीलैंड निर्यात 95% वर्तमान निर्यात पर टैक्स खत्म या कम होंगे
न्यूज़ीलैंड का निवेश 15 साल में 20 अरब अमेरिकी डॉलर
व्यापार का लक्ष्य 5 साल में 5 अरब अमेरिकी डॉलर
वीज़ा सुविधा 5,000 अस्थायी रोजगार वीज़ा (3 साल तक की स्टे)
वर्जित उत्पाद (भारत) डेयरी उत्पाद, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर
समझौते की अवधि मार्च 2025 में शुरू, दिसंबर 2025 में पूरा, 27 अप्रैल 2026 को साइन

सरकार और उद्योग जगत की क्या राय है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक पल बताया है। न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे एक पीढ़ी में एक बार होने वाला बड़ा बदलाव कहा है। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के ट्रेड मिनिस्टर टॉड मैक्ले ने इस डील को औपचारिक रूप दिया। बाहरी मामलों के मंत्री एस जयशंकर ने भी इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए मील का पत्थर माना है। वहीं ASSOCHAM और PHDCCI जैसी संस्थाओं ने उम्मीद जताई है कि इससे भारतीय MSMEs और छात्रों को बड़ा फायदा होगा।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.