India Oil Import: रूस से तेल आयात कम हुआ तो भारत को लगेगा 5 से 10 अरब डॉलर का झटका, अर्थशास्त्री ने दी चेतावनी.

भारत को रूस से कच्चे तेल की खरीद में कटौती करने पर सालाना $5 billion से $10 billion यानी पांच से दस अरब डॉलर तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ सकता है। एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री और पूर्व संयुक्त राष्ट्र सलाहकार Santosh Mehrotra ने हाल ही में चेतावनी दी है कि यदि भारत रूस से होने वाले क्रूड ऑयल आयात में 50 percent यानी पचास प्रतिशत की कमी करता है, तो देश की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा और बड़ा असर पड़ेगा। इस रणनीतिक बदलाव से घरेलू स्तर पर महंगाई में 0.3 percentage point की बढ़ोतरी हो सकती है और साथ ही रुपये तथा देश के चालू खाता घाटे यानी करेंट अकाउंट डेफिसिट पर भारी दबाव बन सकता है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।
रूस पर भारत की निर्भरता और वैश्विक समीकरण
वर्तमान समय में रूस भारत की कुल कच्चे तेल की जरूरत का over 50 percent हिस्सा अकेले पूरा कर रहा है। वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनावों और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में आ रही रुकावटों के बीच भारत की यह निर्भरता काफी बढ़ गई है। अमेरिकी विधायी विकास के तहत विचाराधीन 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' के प्रस्ताव के बाद यह चेतावनी सामने आई है, जिसमें रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। भारतीय अधिकारियों का हमेशा से यह रुख रहा है कि देश के ऊर्जा से जुड़े सभी फैसले पूरी तरह से राष्ट्रीय हित और स्वतंत्र बाजार की वास्तविकताओं के आधार पर लिए जाते हैं।
घटता डिस्काउंट और विशेषज्ञों की नजर
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञ इस पूरी स्थिति पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि रूसी बैरल पर मिलने वाले डिस्काउंट अब घटकर मात्र $1 से $2 per barrel के बीच रह गए हैं। विश्लेषकों का सुझाव है कि सरकार को वैश्विक ऊर्जा बाजार के इन जटिल घटनाक्रमों के बीच बहुत ही सावधानी के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है ताकि आम जनता पर महंगाई का ज्यादा बोझ न पड़े। इस पूरे घटनाक्रम और बाजार के आंकड़ों की विस्तृत समीक्षा के लिए आप ANI News पर जा सकते हैं।