भारत सरकार ने पाकिस्तान को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ़ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह खत्म नहीं करता, सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) निलंबित रहेगी। यह बयान 7 मई 2026 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिया। यह कदम पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन के जवाब में उठाया गया है।

सिंधु जल संधि को क्यों और कब रोका गया?

भारत ने इस संधि को 23 अप्रैल 2025 को निलंबित किया था। यह फैसला 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इस मुद्दे पर भारत के बड़े नेताओं ने कड़ा रुख अपनाया है:

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: उन्होंने 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।
  • गृह मंत्री अमित शाह: उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि यह संधि अब कभी बहाल नहीं होगी।
  • विदेश मंत्रालय: MEA का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है और इसमें देश की पूरी शक्ति का इस्तेमाल किया जाएगा।

पाकिस्तान पर क्या असर हुआ और मौजूदा स्थिति क्या है?

इस फैसले के बाद पाकिस्तान की स्थिति काफी खराब हुई है। भारत ने चेनाब नदी पर बने बगलीहार जैसे बांधों के गेट बंद रखे हैं, जो इस बात का संकेत है कि संधि अभी भी निलंबित है। पाकिस्तान की कृषि पर इसका बड़ा असर पड़ा है:

  • प्रमुख इलाकों में नदियों के बहाव में 20% की गिरावट आई है।
  • कपास के उत्पादन में 30% तक की कमी दर्ज की गई है।

पाकिस्तान ने इस मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) का दरवाजा खटखटाया है। पाकिस्तान का कहना है कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है। दूसरी ओर, भारत का कहना है कि उसने पानी नहीं रोका है, लेकिन डेटा शेयर करने और आयोग की बैठकों जैसे सहयोग पूरी तरह बंद कर दिए हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सिंधु जल संधि को भारत ने कब निलंबित किया था?

भारत ने 23 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में इस संधि को निलंबित किया था, जिसमें 26 लोगों की मृत्यु हुई थी।

संधि निलंबित होने से पाकिस्तान पर क्या असर पड़ा है?

पाकिस्तान की नदियों के बहाव में 20% की कमी आई है और वहां कपास की पैदावार में 30% तक की गिरावट दर्ज की गई है।