भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर विवाद गहरा गया है। भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने का फैसला किया है, जिस पर पाकिस्तान ने कड़ी नाराजगी जताई है। पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि इस कदम से क्षेत्रीय सुरक्षा को बड़ा खतरा हो सकता है।
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भारत ने क्यों लिया यह फैसला
अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमला हुआ था। भारत सरकार ने इस हमले का जिम्मेदार पाकिस्तान को ठहराया और कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। इसी वजह से भारत ने सिंधु जल संधि को कुछ समय के लिए रोकने का फैसला किया और बगलीहार और किशनगंगा बांधों से पानी के बहाव को कुछ समय के लिए सीमित कर दिया।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और चेतावनी
30 जून और 1 जुलाई 2026 को इस्लामाबाद में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar और सूचना मंत्री Attaullah Tarar ने कहा कि कोई भी देश अकेले इस संधि को खत्म या निलंबित नहीं कर सकता। Pakistan की National Security Committee ने यह साफ कर दिया है कि अगर पानी का बहाव रोका गया या पानी का रास्ता बदला गया, तो इसे युद्ध की कार्रवाई (act of war) माना जाएगा।
पानी की कमी के आरोप और सुझाव
Indus River System Authority के चेयरमैन Mehar Ali Shah ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में भारत ने चिनाब नदी में पानी कम कर दिया है, जो संधि के नियमों के खिलाफ है। वहीं, पूर्व विदेश मंत्री Bilawal Bhutto Zardari ने एक नए अंतरराष्ट्रीय कानून का सुझाव दिया है ताकि नदियों के पानी को किसी को डराने या दबाव बनाने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल न किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का रुख
इस संधि को 1960 में World Bank ने करवाया था। जून 2025 में एक कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने यह फैसला सुनाया था कि इस संधि को एक तरफ से निलंबित नहीं किया जा सकता, लेकिन भारत ने इस फैसले को नहीं माना। जानकारों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने से पानी की समस्या और बढ़ सकती है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा होगा।
