भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में पाकिस्तान के खिलाफ बहुत कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने साफ तौर पर कहा कि 1960 में हुई सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) अब पुरानी हो चुकी है और आज के समय में यह काम नहीं करती। भारत का कहना है कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है, वह दोस्ती और सहयोग की उम्मीद नहीं कर सकता।
आतंकवाद और जल संधि पर भारत का रुख
संयुक्त राष्ट्र में भारत के मंत्री सिंह ने कहा कि दुनिया बदल चुकी है, लेकिन 60 साल पुराने समझौते को आज भी वैसा ही नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि यह तर्क ही गलत है कि एक देश जो आतंकवाद को हथियार की तरह इस्तेमाल करता है, वह सहयोग के अधिकारों की मांग करे। भारत के मुताबिक, इस संधि को जवाबदेही से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
भारत सरकार ने इस मामले में कई बड़े कदम उठाए हैं:
- 5 जून 2026: विदेश मंत्रालय ने कहा कि जब तक पाकिस्तान पूरी तरह से सीमा पार आतंकवाद बंद नहीं करता, तब तक यह संधि रुकी रहेगी।
- 12 जून 2026: जल मंत्री C.R. Patil ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित Shah के निर्देश पर काम चल रहा है ताकि पाकिस्तान की तरफ पानी का एक कतरा भी न जाए।
- मई 2025: कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पहले ही इस संधि को निलंबित कर दिया था।
पाकिस्तान का दावा और विवाद
दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने इन बातों को खारिज किया है। 18 जून 2026 को पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने ब्रुसेल्स में कहा कि भारत के 17 प्रोजेक्ट्स पानी पर अपना कब्ज़ा जमाने की कोशिश हैं। पाकिस्तान का कहना है कि अगर पानी के बहाव में कोई बदलाव किया गया, तो वह इसे युद्ध की तरह देखेगा।
इस विवाद में कुछ और अहम बातें सामने आई हैं:
- Permanent Court of Arbitration: इस कोर्ट ने मई 2026 में भारत के प्रोजेक्ट्स पर कुछ पाबंदियां लगाई थीं, लेकिन भारत ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया।
- Dulhasti Stage-II Project: भारत ने चेनाब नदी पर इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है, जिसे पाकिस्तान संधि का उल्लंघन बता रहा है।
- UN मीटिंग: अप्रैल 2026 में पाकिस्तान ने UN में एक मीटिंग की थी, जिसमें भारत के रुख को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया गया था।