भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम में बने 500 मेगावॉट के स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को रात 08:25 बजे क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली। इसका मतलब है कि अब भारत अपने परमाणु कार्यक्रम के दूसरे फेज में कदम रख चुका है और जल्द ही थोरियम का इस्तेमाल कर बिजली बना सकेगा।
PFBR क्या है और इससे भारत को क्या फायदा होगा?
यह एक ऐसा रिएक्टर है जो यूरेनियम और प्लूटोनियम के मिश्रण से चलता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे ज़्यादा नया ईंधन पैदा करता है। इससे भारत को अब बाहरी देशों से यूरेनियम मंगाने पर कम निर्भर रहना होगा और देश में मौजूद थोरियम के विशाल भंडार का इस्तेमाल हो सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की असैन्य परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम बताया है।
दुनिया में भारत का क्या स्थान है और इसकी अहमियत क्या है?
इस खास तकनीक के मामले में भारत अब रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन गया है। अमेरिका और चीन जैसे देशों के पास भी फिलहाल थोरियम-प्लूटोनियम का इस्तेमाल कर बिजली बनाने वाली यह तकनीक नहीं है। एक्सपर्ट जूलियट फॉस्टर के मुताबिक, जब ग्लोबल एनर्जी रूट्स बाधित होते हैं तो बाहरी सप्लाई का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में यह रिएक्टर भारत को लंबी अवधि तक ऊर्जा सुरक्षा देगा।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| रिएक्टर क्षमता | 500 मेगावॉट |
| क्रिटिकैलिटी की तारीख | 6 अप्रैल, 2026 |
| 2047 का लक्ष्य | 100 गीगावॉट क्षमता |
| 2070 का लक्ष्य | शुद्ध शून्य (Net-Zero) उत्सर्जन |
| मुख्य संस्थाएं | IGCAR, BHAVINI और AERB |
| वाणिज्यिक संचालन | 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक |
| बजट आवंटन (SMR) | 20,000 करोड़ रुपये |
