मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से भारत की 50 अरब डॉलर की दवा इंडस्ट्री बड़ी मुश्किल में है। ईरान और इसराइल के बीच टकराव से तेल और व्यापार के रास्ते बंद हो रहे हैं, जिससे दवाइयों को बनाने और भेजने का खर्चा बढ़ रहा है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा क्योंकि आने वाले समय में दवाइयों की कीमतें बढ़ सकती हैं और कुछ जरूरी दवाइयों की किल्लत भी हो सकती है।
दवाइयों के दाम क्यों बढ़ रहे हैं और कौन सी दवाइयां होंगी महंगी
ईरान युद्ध की वजह से समुद्र के मुख्य रास्ते जैसे Strait of Hormuz बंद हो गए हैं, जिससे सामान भेजने वाले जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे माल भाड़े और इंश्योरेंस का खर्चा 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। हवाई माल भाड़े (Air Cargo) के दाम तो 350 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
- पैरासिटामोल, डायबिटीज की दवाइयां और कुछ एंटीबायोटिक्स के दाम बढ़ सकते हैं।
- कैंसर की दवाइयां और वैक्सीन जैसी ठंडी जगह रखने वाली दवाओं (Cold Chain) के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
- कच्चे माल (API) के लिए भारत 74 प्रतिशत चीन पर निर्भर है, जिससे सप्लाई चेन में दिक्कत आ रही है।
- कुछ दवाओं के दाम 25-30 प्रतिशत और कुछ के दाम 300 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
भारत सरकार और एक्सपर्ट्स की क्या राय है
केंद्र सरकार ने 23 अप्रैल 2026 को बताया कि भारत छोटी अवधि की किल्लत झेलने के लिए तैयार है क्योंकि नेफ्था जैसे जरूरी कच्चे माल का घरेलू उत्पादन काफी है। हालांकि, सरकार ने माना कि कच्चे तेल और शिपिंग के बढ़ते दाम स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
Pharmexcil के पूर्व चेयरमैन दिनेश दुआ ने बताया कि वेस्ट एशिया में दवा निर्यात से भारत को 2,500 करोड़ से 5,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। वहीं, Pharmexcil के डायरेक्टर जनरल के राजा भानु ने कहा कि अप्रैल-फरवरी FY26 के दौरान फार्मा निर्यात 5.6 प्रतिशत बढ़ा है और 2030 तक यह इंडस्ट्री 130 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगी।
| विवरण | आंकड़े/डेटा |
|---|---|
| फार्मा इंडस्ट्री का वर्तमान आकार | 50 अरब डॉलर |
| 2030 तक अनुमानित आकार | 130 अरब डॉलर |
| निर्यात वृद्धि (अप्रैल-फरवरी FY26) | 5.6 प्रतिशत |
| कुल निर्यात (अप्रैल-फरवरी FY26) | 28.29 अरब डॉलर |
| एयर कार्गो रेट में बढ़ोतरी | 350 प्रतिशत तक |
| लॉजिस्टिक्स शुल्क में बढ़ोतरी | 30 से 50 प्रतिशत |
| चीन पर कच्चे माल (API) की निर्भरता | 74 प्रतिशत |
| वेस्ट एशिया निर्यात में संभावित नुकसान | ₹2,500 से ₹5,000 करोड़ |
Frequently Asked Questions (FAQs)
युद्ध की वजह से कौन सी दवाइयां महंगी हो सकती हैं?
मुख्य रूप से पैरासिटामोल, डायबिटीज की दवाइयां और कुछ एंटीबायोटिक्स के दाम बढ़ सकते हैं। साथ ही कैंसर की दवाइयां और वैक्सीन जैसी दवाओं की सप्लाई में भी दिक्कत आ सकती है।
दवाइयों के दाम बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
Strait of Hormuz के बंद होने से शिपिंग का खर्चा और एयर कार्गो रेट 350 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से दवा बनाने की लागत बढ़ गई है।