पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिकों का स्वदेश लौटने का सिलसिला तेज़ी से जारी है. विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी है कि 28 फरवरी से अब तक करीब 8,15,000 यात्री इस क्षेत्र से भारत आ चुके हैं. ईरान और इसराइल के बीच बढ़ते विवाद के बाद बड़ी संख्या में लोग अपनी सुरक्षा को देखते हुए भारत वापस आ रहे हैं और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.

यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए क्या हैं सरकारी इंतज़ाम?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि जिन देशों का एयरस्पेस बंद है वहां से भारतीयों को निकालने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल हो रहा है. सरकार ने यात्रियों की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं और मिशनों को अलर्ट पर रखा गया है. भारतीय नागरिकों के लिए ये कुछ प्रमुख व्यवस्थाएं की गई हैं:

  • ईरान में फंसे भारतीयों को आर्मेनिया और अज़रबैजान के रास्ते सुरक्षित निकाला जा रहा है.
  • इसराइल और इराक से आने वाले यात्रियों को जॉर्डन, मिस्र और सऊदी अरब के जरिए भारत लाया जा रहा है.
  • ईरान के जमीनी रास्तों से अब तक 1,864 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है जिसमें छात्र और मछुआरे शामिल हैं.
  • भारतीय मिशन उन देशों में लगातार सक्रिय हैं जहां सीधी उड़ानें प्रतिबंधित कर दी गई हैं.

पश्चिम एशिया में संकट की क्या है ताज़ा स्थिति?

यह पूरा संकट 28 फरवरी 2026 को उस समय शुरू हुआ जब अमेरिकी और इसराइली हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की जान चली गई. इसके बाद से ही पूरे क्षेत्र में अशांति का माहौल है और हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. वर्तमान स्थिति और आंकड़ों को इस तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

विवरण ताज़ा जानकारी
कुल लौटे यात्री लगभग 8,15,000
ईरान में शेष भारतीय लगभग 7,500 नागरिक
प्रभावित देश ईरान, इसराइल, इराक, कुवैत और बहरीन
वैकल्पिक ट्रांजिट रूट जॉर्डन, मिस्र, आर्मेनिया और सऊदी अरब

ईरान के अगले नेता मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर भी कई खबरें सामने आ रही हैं और बताया जा रहा है कि वे फिलहाल शासन चलाने की स्थिति में नहीं हैं. भारत सरकार ने वहां मौजूद अपने बाकी नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें और जल्द से जल्द सुरक्षित रास्तों से बाहर निकल जाएं.