भारत में सड़क हादसों को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब सड़क दुर्घटना होने पर केवल ड्राइवर को जिम्मेदार नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2026 में नागरिकों के लिए ‘राइट टू सेफ पैसेज’ यानी सुरक्षित सफर का अधिकार तय किया है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना गया है। अब सरकार की यह जिम्मेदारी होगी कि सड़कों को सुरक्षित बनाया जाए और किसी भी प्रशासनिक लापरवाही के कारण सड़क को जानलेवा न बनने दिया जाए।

NHAI को देना होगा हर्जाना

अगर हाईवे या एक्सप्रेसवे पर सड़क के डिजाइन में कमी, खराब इंजीनियरिंग या पहले से चिन्हित ‘ब्लैक स्पॉट्स’ की वजह से कोई दुर्घटना होती है, तो इसके लिए NHAI (National Highways Authority of India) जैसे जिम्मेदार विभागों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। पीड़ित परिवार को मुआवजे का भुगतान भी इन्हीं एजेंसियों को करना होगा।

कैसे काम करेगा नया सिस्टम

इस फैसले को लागू करने के लिए हर जिले में डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स बनाई गई है। इसकी कमान जिले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) के हाथ में होगी। अगर जांच में सड़क की खराबी सामने आती है, तो NHAI को 6 से 8 हफ्ते के भीतर पीड़ित परिवार को मुआवजा देना होगा। यदि मुआवजे में देरी होती है, तो उस पर 9 से 12 प्रतिशत सालाना ब्याज का जुर्माना भी लगाया जाएगा। सड़क सुरक्षा के लिए यह कदम सरकार की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ी पहल है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.