भारत और रूस की दोस्ती में नया अध्याय, आर्कटिक रूट पर व्यापार बढ़ाने के लिए पुतिन ने दिया बड़ा बयान.

Sushma Kumari16 August 20264 min read86 viewsIndia
भारत और रूस की दोस्ती में नया अध्याय, आर्कटिक रूट पर व्यापार बढ़ाने के लिए पुतिन ने दिया बड़ा बयान.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत और चीन समेत दुनिया के कई देश उनके देश के नॉर्दर्न सी रूट यानी एनएसआर के विकास और इस पर काम करने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। रूस इन दिनों पश्चिमी देशों के लगाए गए भारी-भरकम प्रतिबंधों के बीच एशिया की तेजी से आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार और परिवहन के रास्तों को और ज्यादा मजबूत करने की कोशिश में जुटा हुआ है। इस नए और वैकल्पिक रास्ते के खुलने से भारत जैसे देशों के लिए यूरोप के बाजारों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा और माल ढुलाई का खर्च भी कम हो जाएगा।

रूस के सुदूर पूर्व दौरे पर सामने आया बड़ा बयान

रूस के अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) के मुताबिक, राष्ट्रपति पुतिन इन दिनों रूस के सुदूर पूर्व और सखालिन क्षेत्र के दौरे पर हैं और वहां चल रहे नौसैनिक अभ्यास की निगरानी कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने पैसिफिक फ्लीट के जवानों से बातचीत करते हुए आर्कटिक रूट पर चल रहे सहयोग का जिक्र किया। पुतिन ने साफ तौर पर कहा कि भारत और चीन उनके प्रमुख साझेदारों में शामिल हैं और इन सभी मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लगातार और सक्रिय बातचीत चल रही है। रूस इस रास्ते को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए एक मुख्य मार्ग बनाने के वास्ते बड़े पैमाने पर पैसा लगा रहा है ताकि व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिल सके।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह नया आर्कटिक रूट

भारत के लिहाज से देखा जाए तो यह रूट यूरोप के उत्तरी और पूर्वी बाजारों तक पहुंचने का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है। मौजूदा समय में मध्य पूर्व यानी मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों की वजह से पारंपरिक स्वेज नहर वाले रास्ते पर असुरक्षा लगातार बढ़ती जा रही है, जिसके चलते आर्कटिक रूट का रणनीतिक महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। भारत और रूस के बीच पहले से ही चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे का संचालन शुरू हो चुका है और अब दोनों देश अपने आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। इसके लिए परिवहन और लॉजिस्टिक्स के नए रास्तों को तलाशना बहुत जरूरी हो गया है।

रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम और भारत के बीच समझौता

बीते महीने ही रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन ने देश की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम को यह निर्देश दिया था कि वह आर्कटिक रूट पर समुद्री माल ढुलाई को लेकर भारत के साथ एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर करे। आपको बता दें कि रोसाटॉम नॉर्दर्न सी रूट की अधिकृत ऑपरेटर और समन्वयक कंपनी है, जो रूस के परमाणु ऊर्जा से चलने वाले आइसब्रेकर जहाजों के बेड़े का प्रबंधन भी संभालती है। ये खास किस्म के जहाज आर्कटिक की भयंकर ठंड और बर्फीली परिस्थितियों के बीच भी समुद्री रास्ते को जहाजों के आने-जाने के लिए खुला रखते हैं ताकि व्यापार में कोई रुकावट न आए।

जहाजों के निर्माण और कंटेनर शिपिंग पर भी हो रही चर्चा

रूसी अधिकारियों के अनुसार इस समय भारत और रूस मिलकर आइस-क्लास जहाजों और कंटेनर शिपिंग के विकास में सहयोग करने की संभावनाओं पर भी गहराई से बातचीत कर रहे हैं। भारतीय शिपयार्ड आर्कटिक की मुश्किल परिस्थितियों में आसानी से काम करने वाले गैर-परमाणु आइसब्रेकर बनाने की संभावनाओं को टटोल रहे हैं। रूस का ऐसा मानना है कि भारत की इस साझेदारी से नॉर्दर्न सी रूट पर व्यापार तेजी से बढ़ेगा। वहीं दूसरी तरफ भारत को इसके जरिए रूस के सुदूर पूर्व इलाकों और यूरोपीय बाजारों के साथ नए व्यापारिक रिश्ते कायम करने का बहुत बड़ा अवसर मिलेगा।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य की रुकावटों से मिलेगा छुटकारा

कुछ महीने पहले जून में सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान रूस के 'फार ईस्ट और आर्कटिक विकास' मंत्री एलेक्सी चेकुनकोव ने आरटी से बातचीत में बताया था कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार को लेकर आ रही दिक्कतों के बीच भारत इस वैकल्पिक समुद्री मार्ग के इस्तेमाल पर गंभीरता से विचार कर रहा है। पुतिन के इस ताजा बयान से यह बात साफ हो जाती है कि रूस आर्कटिक शिपिंग के जरिए पश्चिमी देशों पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है और एशिया के अपने पुराने और भरोसेमंद साथियों के साथ व्यापार को नए आयाम देना चाहता है।

Share:

Comments

Leave a comment