भारत और दक्षिण कोरिया ने मिलाया हाथ, रक्षा और व्यापार में होगा बड़ा बदलाव, 2030 तक व्यापार का लक्ष्य 50 अरब डॉलर
भारत और दक्षिण कोरिया ने अपनी दोस्ती को और मजबूत करने का फैसला किया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae Myung भारत आए, जहां उन्होंने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा, व्यापार और नई टेक्नोलॉजी पर बात की। दोनों देशों ने मिलकर एक नया विजन तैयार किया है ताकि आने वाले सालों में दोनों देश साथ मिलकर तरक्की कर सकें।
व्यापार और निवेश के मुख्य आंकड़े क्या हैं?
भारत और दक्षिण कोरिया ने आर्थिक रिश्तों को सुधारने के लिए कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं। व्यापार घाटे को कम करने और नए निवेश लाने के लिए खास रणनीति बनाई गई है। मुख्य जानकारी नीचे दी गई टेबल में देखें:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| वर्तमान व्यापार | लगभग 27 अरब डॉलर |
| 2030 तक का लक्ष्य | 50 अरब डॉलर |
| स्टील प्लांट निवेश | 35,000 करोड़ रुपये |
| प्लांट की क्षमता | 6 मिलियन टन प्रति वर्ष |
| रणनीतिक विजन अवधि | 2026 से 2030 |
| राष्ट्रपति का दौरा | 19 से 21 अप्रैल 2026 |
| नया निवेश प्रोजेक्ट | JSW Steel और POSCO जॉइंट वेंचर |
रक्षा और नई तकनीक पर क्या हुआ फैसला?
भारत और दक्षिण कोरिया अब हथियारों के उत्पादन में और साथ काम करेंगे। K9 Vajra तोपों की सफलता के बाद अब एयर डिफेंस जैसे नए सिस्टम पर काम होगा। इसके लिए KIND-X नाम का एक नया प्लेटफॉर्म शुरू किया जाएगा। साथ ही, भारत का UPI अब दक्षिण कोरिया में भी चलेगा, जिससे वहां जाने वाले लोगों को पेमेंट करने में आसानी होगी।
पर्यावरण और सुरक्षा पर क्या सहमति बनी?
दोनों देशों ने कार्बन मार्केट और प्रदूषण कम करने के लिए पेरिस समझौते के तहत एक डील की है। इसके अलावा, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को खुला और सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने की बात कही है और आने वाले समय में कई और मंत्री स्तर की मुलाकातें होंगी।