भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जाने का फैसला किया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae Myung की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों ने डिफेंस, व्यापार और नई टेक्नोलॉजी पर जोर दिया है। अब दोनों देश मिलकर हथियारों के निर्माण और नए उद्योगों पर काम करेंगे ताकि भविष्य में दोनों देशों की तरक्की हो सके।

व्यापार और अर्थव्यवस्था में क्या बड़े बदलाव होंगे?

भारत और दक्षिण कोरिया ने तय किया है कि वे अपने आपसी व्यापार को काफी बढ़ाएंगे। अभी यह व्यापार करीब 27 अरब डॉलर है, जिसे 2030 तक 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पुराने व्यापार समझौतों को अपडेट किया जाएगा। साथ ही, भारत के UPI और कोरियाई डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ा जाएगा ताकि पैसों का लेन-देन आसान हो सके। Samsung, Hyundai और LG जैसी बड़ी कंपनियां भी इस साझेदारी का हिस्सा रहेंगी।

डिफेंस और नई टेक्नोलॉजी में कैसे होगा सहयोग?

रक्षा क्षेत्र में भारत अब तीसरे चरण में प्रवेश कर रहा है, जहाँ सिर्फ हथियार खरीदना नहीं बल्कि उन्हें साथ मिलकर बनाना मुख्य लक्ष्य होगा। K9 Vajra तोपों की तरह अब नए मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म पर काम होगा। इसके लिए KIND-X नाम का एक नया प्लेटफॉर्म शुरू किया जाएगा जो डिफेंस स्टार्टअप्स और रिसर्च की मदद करेगा। इसके अलावा AI, सेमीकंडक्टर और परमाणु ऊर्जा जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

समुद्री व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में क्या तय हुआ?

दोनों देशों ने जहाज बनाने और समुद्री सामान पहुँचाने के लिए एक नया ढांचा तैयार किया है। दक्षिण कोरियाई कंपनियों को भारत के ‘मैरीटाइम अमृत काल 2047’ विजन का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें करीब 400 जहाज बनाने की योजना है। ऊर्जा के क्षेत्र में दक्षिण कोरिया अब इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) से जुड़ गया है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन और कार्बन मार्केट पर भी एक समझौता हुआ है ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।