भारत और दक्षिण कोरिया ने अपनी दोस्ती को एक नए लेवल पर पहुँचाया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने डिफेंस, व्यापार और नई टेक्नोलॉजी पर हाथ मिलाया है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली ने दिल्ली में मुलाकात की और कई अहम समझौतों पर साइन किए। इस मुलाकात को दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है।

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डिफेंस और टेक्नोलॉजी में क्या बदलाव आएंगे

दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। अब दक्षिण कोरिया भारत को केवल तोप ही नहीं, बल्कि युद्धपोत, बख्तरबंद गाड़ियाँ और मिसाइल सिस्टम भी देगा। इसके लिए ‘KIND-X’ नाम का एक नया प्लेटफॉर्म बनाया गया है जिससे स्टार्टअप्स और कंपनियां मिलकर काम करेंगी। चिप्स और AI के लिए ‘India-Korea Digital Bridge’ की शुरुआत की गई है ताकि भारत में सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियां लग सकें।

व्यापार और पैसे के लेन-देन का नया तरीका क्या होगा

भारत और दक्षिण कोरिया ने 2030 तक अपने व्यापार को 27 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। व्यापार को आसान बनाने के लिए CEPA समझौते को 2027 तक अपडेट किया जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि अब UPI की तरह भारत और कोरिया के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को जोड़ा जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच पैसों का लेन-देन बहुत आसान हो जाएगा।

शिपिंग और स्पेस में क्या खास होगा

दक्षिण भारत में एक बड़ा शिपयार्ड बनाया जाएगा जिसे HD Korea Shipbuilding कंपनी संभालेगी। इसके अलावा, अंतरिक्ष के क्षेत्र में ISRO और कोरिया की KASA एजेंसी मिलकर काम करेंगी। दोनों देशों ने साफ़ किया है कि वे हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) को खुला और नियमों पर आधारित रखना चाहते हैं। साथ ही, दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने की बात कही है।