भारत और दक्षिण कोरिया ने अपनी दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का फैसला किया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार और नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मिलकर काम करने पर सहमति जताई। इस मुलाकात में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई अहम समझौतों पर मुहर लगाई।

व्यापार और पैसों के लेन-देन में क्या होगा बदलाव?

दोनों देशों ने व्यापार को बढ़ाने के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। अभी यह व्यापार 27 अरब डॉलर है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने की योजना है। इसके लिए CEPA समझौते में सुधार किया जाएगा ताकि व्यापार में आने वाली रुकावटें दूर हों। साथ ही, अब भारत के UPI और दक्षिण कोरिया के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच पैसों का लेन-देन बहुत आसान हो जाएगा।

डिफेंस और नई टेक्नोलॉजी पर क्या हुआ फैसला?

रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए ‘Korea-India Defence Accelerator’ (KIND-X) की शुरुआत की जाएगी, जो स्टार्टअप्स और रिसर्चर्स को एक साथ लाएगा। इसके अलावा K9-वज्र होवित्जर तोपों के प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम होगा। टेक्नोलॉजी के लिए ‘India-Korea Digital Bridge’ बनाया गया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर्स पर ध्यान दिया जाएगा। समुद्री जहाजों के निर्माण और शिपिंग के लिए भी एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।

मुख्य क्षेत्र तय किया गया लक्ष्य या फैसला
कुल व्यापार (2030 तक) 50 अरब डॉलर
वर्तमान व्यापार 27 अरब डॉलर
डिजिटल पेमेंट UPI और कोरियाई सिस्टम का जुड़ाव
डिफेंस प्रोग्राम KIND-X का शुभारंभ
नई टेक्नोलॉजी AI और सेमीकंडक्टर्स पर फोकस
ऊर्जा क्षेत्र ग्रीन हाइड्रोजन और न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स
समुद्री क्षेत्र शिपबिल्डिंग और लॉजिस्टिक्स फ्रेमवर्क