India-South Korea Partnership: भारत और दक्षिण कोरिया की दोस्ती हुई और गहरी, अब मिलेंगे आधुनिक युद्धपोत और मिसाइल
भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने रिश्तों को एक नए लेवल पर पहुँचाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्योंग ने दिल्ली में मुलाकात कर रक्षा, व्यापार और नई टेक्नोलॉजी पर जोर दिया। दोनों देशों ने अगले पांच साल (2026-2030) के लिए एक खास विज़न तैयार किया है, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग और बढ़ेगा।
रक्षा क्षेत्र में क्या होगी बड़ी साझेदारी?
दक्षिण कोरिया अब भारत को सिर्फ तोप ही नहीं, बल्कि युद्धपोत, बख्तरबंद गाड़ियां और मिसाइलें भी देने की तैयारी में है। यह कदम भारत की आत्मनिर्भर भारत नीति का समर्थन करता है, जिससे भारत अपनी सैन्य जरूरतों के लिए अन्य देशों पर निर्भरता कम कर सकेगा। K9 वजरा-T जैसी तोपें इस सहयोग का एक बड़ा उदाहरण हैं। चीन इस बढ़ती नजदीकी को काफी बारीकी से देख रहा है और इसे संवेदनशील मान रहा है।
व्यापार और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
दोनों देशों ने तय किया है कि 2030 तक आपसी व्यापार को लगभग 27 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक ले जाया जाएगा। इसके लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत फिर से शुरू हुई है, जिसे 2027 के मध्य तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, सप्लाई चेन को मजबूत करने और जरूरी रिसोर्सेज के लिए एक इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग भी शुरू किया गया है।
टेक्नोलॉजी और स्पेस में क्या नया होगा?
दोनों देशों ने इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज पहल शुरू की है, जिसमें AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इनोवेशन पर काम होगा। स्पेस के क्षेत्र में ISRO और दक्षिण कोरिया की KASA मिलकर सैटेलाइट नेविगेशन और स्टार्टअप्स पर काम करेंगे। इसके अलावा शिपबिल्डिंग, क्लीन एनर्जी और न्यूक्लियर पावर प्लांट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में भी दोनों देश एक-दूसरे का साथ देंगे। मुंबई में कोरियन मैरीटाइम इंडस्ट्री ऑफिस खोलने की भी बात हुई है।